ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान यानी चिड़ियाघर में वन्यजीवों की संख्या और उनकी नस्ल में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने के लिए देहरादून जू से एक स्वस्थ नर यलो टाइगर को ग्वालियर सुरक्षित पहुंचाया गया है। इस अदला-बदली के तहत ग्वालियर जू से भी एक नर व्हाइट टाइगर को देहरादून भेजा जाएगा।
सीजेए के नियमों के तहत होगी निगरानी
चिड़ियाघर के क्यूरेटर गौरव परिहार ने जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार की सुबह देहरादून से लाए गए इस बाघ को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के तय मानकों के अनुसार 7 से 10 दिनों की अवधि के लिए क्वारंटाइन में रखा गया है। इस पूरी अवधि के दौरान विशेषज्ञ चिकित्सकों और कर्मचारियों की टीम उसके स्वास्थ्य, शारीरिक व्यवहार और नए परिवेश के अनुकूल ढलने की प्रक्रिया पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है।
प्रशासनिक निर्देशों के अनुपालन में एक विशेष दल को देहरादून भेजा गया था। निगमायुक्त अभिषेक चौधरी के दिशा-निर्देशों पर चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उपेन्द्र सिंह यादव, क्यूरेटर गौरव परिहार और जू कीपर शिवकुमार पाल की टीम ने वहां जाकर बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण किया और पूरी सुरक्षा के साथ उसे ग्वालियर लेकर पहुंचे।
जल्द पर्यटकों को मिलेगा दीदार
क्वारंटाइन का समय पूरा होने तथा नए माहौल में पूरी तरह से ढल जाने के बाद इस नए यलो टाइगर को पर्यटकों के दीदार के लिए मुख्य बाड़े में छोड़ा जाएगा। माना जा रहा है कि इसके आने से स्थानीय पर्यटकों में खासा उत्साह देखने को मिलेगा और वे जल्द ही इस नए मेहमान की दहाड़ सुन सकेंगे।
भोपाल के चंदनपुरा में दिखा टाइगर
दूसरी ओर, भोपाल के चंदनपुरा इलाके से भी बाघ की मौजूदगी की खबर सामने आई है। शुक्रवार की सुबह जब कुछ लोग मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, तब उन्हें वहां टाइगर का मूवमेंट दिखाई दिया। एक स्थानीय दंपती के तो बाघ काफी करीब तक पहुंच गया था, लेकिन महिला द्वारा तुरंत शोर मचाए जाने पर वह पास की झाड़ियों में वापस लौट गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने फौरन मौके पर पहुंचकर सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!