ग्वालियर शहर के बाजारों में इन दिनों त्योहारी खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। इस दौरान बाजार पहुंचने वाले लोगों को सबसे बड़ी समस्या वाहन पार्किंग की हो रही है। हालात यह हैं कि थोड़ी सी खरीदारी के बाद जब लोग अपनी जगह पर लौटते हैं, तो वाहन गायब मिलते हैं।
सड़क किनारे वाहन खड़े करने पर हो रही कार्रवाई
महाराज बाड़ा, मुरार और हजीरा जैसे प्रमुख बाजारों में पार्किंग के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण लोगों को मजबूरन अपने दोपहिया और चार पहिया वाहन सड़क किनारे खड़े करने पड़ते हैं। इसके बाद यातायात पुलिस द्वारा ऐसे वाहनों को क्रेन की मदद से उठाकर ले जाया जा रहा है।
वाहन गायब मिलने पर चालकों को पहले चोरी की आशंका होती है, लेकिन बाद में पता चलता है कि पुलिस ने गाड़ी जब्त कर ली है। वाहन को ढूंढने और उसे थाने से छुड़वाने की प्रक्रिया में लोगों का कीमती समय बर्बाद हो रहा है।
जुर्माने की भारी भरकम रकम से लोग परेशान
कई मामलों में लोग मामूली वस्तुएं खरीदने बाजार पहुंचते हैं, लेकिन नो-पार्किंग जोन से वाहन छुड़ाने के चक्कर में उन्हें सात सौ रुपए तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रतिदिन औसतन 110 से अधिक वाहन पुलिस द्वारा उठाए जा रहे हैं।
यातायात विभाग के अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि त्योहारों के दिनों में बाजारों में यातायात व्यवस्था सुचारू रखने और जाम से बचने के लिए यह कदम उठाया जाता है। नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर दो सौ रुपए टोइंग चार्ज और पांच सौ रुपए का चालान लगाया जाता है।
आबादी के मुकाबले पार्किंग स्थलों की कमी
शहर की लगभग 14 लाख की आबादी के लिए प्रशासन द्वारा 15 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। इनमें मल्टीलेवल पार्किंग, पेड पार्किंग और कुछ अस्थायी स्थल शामिल हैं, लेकिन त्योहारी भीड़ के सामने यह इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
विशेष तौर पर हजीरा और मुरार के बाजारों में वाहन खड़े करने के लिए कोई उचित स्थान नहीं है, जिसके कारण खरीदार सड़क किनारे गाड़ियां खड़ी करने को विवश हैं। प्रशासन ने अपील की है कि लोग भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में आने के लिए सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!