मध्य प्रदेश शासन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा अटैचमेंट की व्यवस्था समाप्त किए जाने के बाद, सबलगढ़ सिविल अस्पताल के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शासन के निर्देशों का पालन करते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मांगरोल के डॉ. आर. एन. शर्मा को सीबीएमओ के प्रभार से कार्यमुक्त कर दिया गया है और उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेज दिया गया है।
अटैचमेंट खत्म होने से गहराया डॉक्टरों का संकट
इस प्रशासनिक फेरबदल और अटैचमेंट समाप्त होने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं काफी प्रभावित हुई हैं। स्थिति यह है कि वर्तमान में इस अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के सभी सातों पद पूरी तरह से खाली पड़े हैं। इसके साथ ही, पिछले छह लंबे वर्षों से हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन और फिजिशियन समेत कुल पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी रिक्त चल रहे हैं।
ओपीडी का भार और मरीजों की परेशानी
अस्पताल की दैनिक ओपीडी में रोजाना 600 से 800 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों के नहीं होने के कारण उनके केबिन खाली नजर आते हैं। मरीजों की मजबूरी को देखते हुए ओपीडी संचालन की जिम्मेदारी सीएचओ को सौंपी जा रही है। समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण स्थानीय नागरिकों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है या फिर उन्हें अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है।
नई व्यवस्था और डॉक्टरों की मांग पर जोर
इन तमाम चुनौतियों के बीच, अस्पताल का नया प्रभार संभालने वाले नवनियुक्त सीबीएमओ डॉ. बृजेश गोयल ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल की सफाई व्यवस्था और चिकित्सीय सेवाओं को पटरी पर लाना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए जल्द ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से अतिरिक्त डॉक्टरों की मांग की जाएगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!