भिंड जिले में कुछ ही हफ्तों में पूंजी दोगुनी करने का लालच देकर सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये ऐंठने वाली ऑरोरा एक्स कंपनी के प्रबंधकों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस द्वारा जारी किए गए दो अलग-अलग नोटिसों के बाद भी कंपनी के मुख्य संचालक अपना स्पष्टीकरण देने के लिए सामने नहीं आए हैं।

हजारों निवेशकों को दिया गया था झांसा

जानकारी के अनुसार, इस संदिग्ध कंपनी ने शहर की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अपना कार्यालय स्थापित कर कामकाज शुरू किया था। शुरुआती दिनों में निवेशकों को कम समय में बड़ी रकम लौटाने का झांसा दिया गया, जिससे प्रभावित होकर स्थानीय लोगों ने अंधाधुंध पैसा लगा दिया। इस धोखाधड़ी के जाल को फैलाने के लिए मल्टी-लेवल मार्केटिंग का तरीका अपनाया गया था, जिसमें जुड़ने वाले लोगों को अपने परिचितों को भी शामिल करने के लिए उकसाया जाता था।

हालाँकि, पिछले महीने के मध्य से जब निवेशकों ने अपना मुनाफा और मूलधन निकालना चाहा, तो कंपनी के स्तर पर टालमटोल शुरू हो गई। इसके बाद ठगी का शिकार हुए लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और वे लगातार पुलिस थाने पहुंचकर अपनी पीड़ा बताने लगे।

दो बार थमाया गया नोटिस, पर नहीं मिला जवाब

इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग की साइबर सेल ने कंपनी से जुड़े नितेश सिंह और मलखान सिंह के नाम नोटिस जारी किया था। उन्हें तय समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज और पक्ष रखने को कहा गया था। जब पहली अवधि में कोई जवाब नहीं मिला, तो पुलिस ने दोबारा स्मरण पत्र भेजकर एक निश्चित समय पर हाजिर होने का निर्देश दिया, लेकिन संचालकों ने इसकी भी अनदेखी कर दी।

लगातार दो बार नोटिस की अवहेलना होने के बाद पुलिस प्रशासन अब और अधिक सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। पुलिस महकमे के पास लगातार नए निवेशक पहुंच रहे हैं, जिनकी पूंजी इस फर्जीवाड़े में फंस चुकी है। ऐसे में आरोपियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।

कारਵਾਈ टालने के लिए सियासी दबाव का सहारा

विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह बात भी सामने आई है कि पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कंपनी से जुड़े लोग भूमिगत हो चुके हैं। वे खुद सामने आने के बजाय प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के रसूखदार नेताओं के जरिए पुलिस अधिकारियों पर फोन करवाकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि, स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने इन सभी सियासी दबावों को दरकिनार कर निष्पक्ष वैधानिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

देहात थाना प्रभारी शिवप्रताप सिंह राजावत ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार संचालकों को नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था, जिसकी समयसीमा निकल चुकी है। यदि समय पर जवाब दाखिल नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी सख्ती के साथ अंजाम दिया जाएगा।