गुना जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने एक महत्वपूर्ण प्रकरण में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ दाखिल किए गए परिवाद को आंशिक रूप से मंजूर कर लिया है। इसके तहत सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अमन जाट के परिवार को बड़ी राहत मिली है।

क्या था पूरा सड़क हादसे का मामला

यह पूरा घटनाक्रम 11 सितंबर 2024 का है, जब एक भीषण सड़क हादसे में कार और ट्रक की टक्कर हो गई थी। इस दुर्घटना में अमन जाट को गंभीर चोटें आईं और उनकी मौत हो गई थी। इस मामले में गुना के कैंट थाने में अपराध क्रमांक 0936/2024 दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच पूरी करने के बाद अदालत में ट्रक चालक के खिलाफ अभियोग पत्र दाखिल किया था।

मृतक अमन जाट ने टाटा एआईए की परम रक्षक प्लस सोल्यूशन पॉलिसी ले रखी थी। इस बीमा पॉलिसी के तहत एक करोड़ रुपये का लाइफ कवर और एक करोड़ नब्बे लाख रुपये का एक्सीडेंटल डेथ रिस्क कवर शामिल था। इस पॉलिसी के एवज में पहली किस्त के रूप में 69,339 रुपये और दूसरी किस्त के तौर पर 70,410 रुपये जमा किए गए थे, जिसमें उनके पिता हरिसिंह जाट को नॉमिनी बनाया गया था।

बीमा कंपनी ने खारिज कर दिया था क्लेम

हादसे के बाद जब परिजनों ने बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने जांच बैठाई। शुरुआत में जांचकर्ता ने क्леम देने की सिफारिश की थी, लेकिन बाद में 24 फरवरी 2025 को कंपनी ने क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना से जुड़ी जानकारियों में विसंगतियां हैं और कथित चालक ऋषिकेश सेन को गंभीर चोटें नहीं आईं, जिससे दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत होते हैं।

कंपनी ने यह भी दावा किया कि अमन जाट असल में चालक की सीट पर बैठे थे और तथ्यों को छिपाया गया है। इसी आधार पर कंपनी ने पॉलिसी को शून्य करार देते हुए प्रीमियम की राशि भी जब्त करने की बात कही थी।

आयोग ने खारिज किए कंपनी के तर्क

सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने पुलिस के अभियोग पत्र, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त अमन जाट कार की अगली सीट पर बैठे थे और वाहन ऋषिकेश सेन चला रहे थे। ट्रक कार के पिछले हिस्से में टकराया था, जिससे अमन को घातक चोटें आईं।

आयोग ने बीमा कंपनी के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें अमन के चालक की सीट पर होने की बात कही गई थी। अदालत ने माना कि कंपनी का रवैया सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा को दर्शाता है, क्योंकि पॉलिसी की किसी भी शर्त का उल्लंघन साबित नहीं हुआ है।

दो महीने के भीतर करना होगा भुगतान

जिला आयोग ने बीमा कंपनी को आदेशित किया है कि वह फैसले की तारीख से दो महीने के भीतर एक करोड़ नब्बे लाख रुपये की दुर्घटना बीमा राशि का भुगतान परिजनों को करे। यह राशि 24 फरवरी 2025 से लेकर वास्तविक भुगतान की तिथि तक 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ देनी होगी।

इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के एवज में 25 हजार रुपये और वाद तथा वकील की फीस के रूप में 10 हजार रुपये यानी कुल 35 हजार रुपये अतिरिक्त अदा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। आयोग ने यह भी साफ किया है कि यदि निर्धारित दो महीने में राशि नहीं दी गई, तो उस पर भी 7 प्रतिशत की दर से ब्याज वसूला जाएगा।