दतिया जिले के इंदरगढ़ क्षेत्र में संचालित शासकीय अनुसूचित जाति बालक छात्रावास भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। 80 सीटों वाले इस हॉस्टल में गरीब छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं कागजों तक सीमित सिमट कर रह गई हैं। हाल ही में छात्र संगठन के विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया और हॉस्टल की जमीनी हकीकत सामने आई।

तहसीलदार के औचक निरीक्षण में खुली पोल

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा किए गए धरने के बाद इंदरगढ़ के तहसीलदार दीपक यादव ने अचानक उक्त छात्रावास का रुख किया। जब वे किसी तरह परिसर के अंदर पहुंचे तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था और एक भी विद्यार्थी हॉस्टल में मौजूद नहीं मिला। जांच के दौरान जो नजारा सामने आया, उसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों के पलंग पर बंधा मिला विदेशी नस्ल का कुत्ता

निरीक्षण में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि छात्रावास के एक छात्र के लोहे वाले पलंग पर अधीक्षक का पालतू विदेशी नस्ल का कुत्ता जंजीर से जकड़ा हुआ था। कुत्ते के बिल्कुल पास ही उसके खाने-पीने के बर्तन भी रखे हुए थे, जिससे साफ जाहिर होता है कि सरकारी कमरों का इस्तेमाल किस तरह निजी स्वार्थ के लिए किया जा रहा था।

रसोई घर में सड़ी सब्जियां और कीड़े

हॉस्टल की रसोई की स्थिति बेहद दयनीय और अस्वास्थ्यकर पाई गई। वहां रखी आटे की बोरियों के भीतर कीड़े बिलबिलाते हुए नजर आए। इसके अलावा, इतनी भीषण बदबू आ रही थी कि अंदर ज्यादा देर खड़ा होना भी दूभर हो गया। सुविधाओं के अभाव और ऐसी बदतर स्थिति के चलते छात्र हॉस्टल छोड़ने को मजबूर हैं और अपने रिश्तेदारों के यहां या फिर बाहर किराए के कमरे लेकर रहने को विवश हैं।

इतना ही नहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बीच हॉस्टल के मेंटेनेंस के नाम पर आए लगभग 40 लाख रुपए के बजट को ठिकाने लगाने और लीपापोती किए जाने के गंभीर आरोप भी लग रहे हैं। निरीक्षण के दौरान जब प्रशासनिक अधिकारियों ने नदारद अधीक्षक डॉ. डीआर राहुल से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन तक उठाना मुनासिब नहीं समझा।

मैंने आज इंदरगढ़ के छात्रावास का निरीक्षण किया था। बहुत ज्यादा खामियां पाई गईं और छात्रावास अधीक्षक का व्यवहार भी छात्रों ने नकारात्मक बताया। हमने पूरी रिपोर्ट कलेक्टर साहब के पास भेज दी है। - दीपक यादव, तहसीलदार इंदरगढ़