स्ट्रोक आने से पहले शरीर देता है ये चेतावनी संकेत, जानिए कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए

भारत में स्ट्रोक (ब्रेन अटैक) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले इसे बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रोक एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट की देरी मरीज की जान और मस्तिष्क दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।

क्या होता है स्ट्रोक?

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है या काफी कम हो जाता है। इससे दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते, जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं कुछ ही मिनटों में क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।

मुख्य रूप से स्ट्रोक दो प्रकार का होता है—

  • इस्कीमिक स्ट्रोक: जब रक्त का थक्का मस्तिष्क की धमनी को ब्लॉक कर देता है।
  • हेमोरेजिक स्ट्रोक: जब मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है और अंदर रक्तस्राव होने लगता है।

स्ट्रोक आने से पहले दिख सकते हैं ये संकेत

यदि किसी व्यक्ति में अचानक नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए—

  • चेहरे, हाथ या पैर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन
  • बोलने में कठिनाई या शब्दों का स्पष्ट न निकलना
  • भ्रम या चीजों को समझने में परेशानी
  • एक या दोनों आंखों से धुंधला या दोहरा दिखाई देना
  • अचानक तेज सिरदर्द
  • संतुलन और शरीर का तालमेल बिगड़ना
  • चक्कर आना या चलने में कठिनाई

स्ट्रोक के बाद क्या हो सकती हैं परेशानियां?

यदि समय पर इलाज न मिले तो मरीज को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे—

  • शरीर के एक हिस्से में लकवा
  • बोलने और समझने में कठिनाई
  • याददाश्त कमजोर होना
  • देखने की क्षमता प्रभावित होना
  • मानसिक तनाव या अवसाद
  • गंभीर मामलों में मृत्यु

BEFAST नियम से पहचानें स्ट्रोक

स्ट्रोक की पहचान के लिए डॉक्टर BEFAST नियम अपनाने की सलाह देते हैं—

  • B (Balance): अचानक संतुलन बिगड़ना
  • E (Eyes): आंखों की रोशनी में अचानक बदलाव
  • F (Face): चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना
  • A (Arms): हाथ या पैर में कमजोरी
  • S (Speech): बोलने में दिक्कत या आवाज लड़खड़ाना
  • T (Time): तुरंत अस्पताल पहुंचना और इलाज शुरू कराना

कैसे करें बचाव?

स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है यदि—

  • रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखा जाए।
  • नियमित व्यायाम किया जाए।
  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाई जाए।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लिया जाए।
  • वजन नियंत्रित रखा जाए।
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराई जाए।

निष्कर्ष

स्ट्रोक एक जानलेवा स्थिति हो सकती है, लेकिन इसके शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानकर और तुरंत इलाज शुरू कराकर गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति में अचानक चेहरे का टेढ़ा होना, बोलने में परेशानी, हाथ-पैर में कमजोरी या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए।