ग्वालियर-चंबल संभाग के गुना जिले के कैंट थाना क्षेत्र में सामने आए नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। पुलिस जांच के दायरे में आए आरोपी गौरव खटीक को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कोई राहत नहीं मिल सकी है। न्यायालय ने मामले की नजाकत और गंभीरता को ध्यान में रखते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है।
प्रेम प्रसंग के जाल में उलझाकर लगाई नशे की लत
यह पूरा मामला वर्ष 2025 का है, जब स्थानीय पुलिस के सामने चौंकाने वाली बातें आईं। जांच में पता चला कि आरोपी युवक ने नाबालिग को अपने प्रेमजाल में फंसा लिया था और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। इसके बाद आरोपी ने उसे शराब पीने की आदत डाल दी और उसके साथ अनुचित कृत्य किया। पुलिस के मुताबिक, नशे की जरूरत पूरी करने के लिए पैसों का अभाव होने पर उसे एक महिला के पास भेज दिया गया, जहां से उसे अनैतिक गतिविधियों के दलदल में धकेल दिया गया।
घर पर संचालित होता था अवैध धंधा
पीड़िता की ओर से दिए गए बयानों के मुताबिक, जिस महिला के संपर्क में उसे लाया गया था, वह अपने घर पर ही यह अवैध कारोबार चलाती थी। आरोप है कि विभिन्न लोग वहां आते थे और महिला को रकम चुकाकर नाबालिग का शोषण करते थे। पीड़िता ने पुलिस को यह भी बताया कि इस कृत्य में उस महिला के पति और बेटे की भी संलिप्तता रही है। इन खुलासों के बाद पुलिस ने मामले में पॉक्सो एक्ट और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराएं जोड़ दीं।
गुमशुदगी की रिपोर्ट से खुला सनसनीखेज राज
इस प्रकरण की शुरुआत 14 नवंबर 2025 को हुई थी, जब पीड़िता के पिता ने कैंट थाने पहुंचकर बेटी के घर से गायब होने की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि 12 नवंबर की दोपहर करीब तीन बजे उनकी 13 साल की बेटी बिना किसी को बताए कहीं चली गई थी। पुलिस ने तुरंत गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की और 18 नवंबर को नाबालिग को दस्तयाब कर लिया। इसके बाद जब पुलिस ने उसके विस्तृत बयान लिए, तब जाकर इस आपराधिक षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ।
जुलाई में हुई थी गिरफ्तारी और अब अदालत का फैसला
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए कैंट पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपी गौरव खटीक को 24 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था। जेल में बंद आरोपी की ओर से बाद में जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपराध की भीषण प्रकृति का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया।
न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि वर्तमान समय में बच्चों के खिलाफ इस प्रकार के गंभीर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, जिन पर प्रभावी अंकुश लगाना बेहद जरूरी है। इसी मुख्य आधार पर अदालत ने आरोपी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। फिलहाल पुलिस इस संगीन मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई को अंजाम दे रही है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!