अशोकनगर जिले के चंदेरी क्षेत्र में सरकारी नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवकों से ठगी करने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने भोपाल की रहने वाली मुख्य आरोपी तृप्ति सिंह राजपूत को गिरफ्तार किया है, जो खुद को बड़ा सरकारी अधिकारी बताकर लोगों पर रौब झाड़ती थी।

शानो-शौकत और फर्जी दस्तावेजों से दिखाती थी रसूख

जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला अपने रसूख को साबित करने के लिए लग्जरी जीवनशैली का दिखावा करती थी। वह किराए की इनोवा गाड़ी पर भारत सरकार की नेम प्लेट लगाकर चलती थी। इसके अलावा उसके पास से सीबीआई अधिकारी का एक कथित फर्जी पहचान पत्र, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के फर्जी लेटरहेड और अन्य जाली दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

आरोपी महिला कभी खुद को आईएएस अधिकारी, कभी मध्यप्रदेश टूरिज्म विभाग की एडिशनल डायरेक्टर तो कभी मानव संसाधन विकास मंत्रालय की हेड बताती थी। महंगे होटलों में रुकना और वीआईपी की तरह रहना उसके ठगी के जाल का मुख्य हिस्सा था।

किला कोठी में की थी ठगी की साजिश

पुलिस के अनुसार, पिछले साल 7 अप्रैल 2025 को तृप्ति सिंह अपने भाई सुधांशु सिंह राजपूत और साथियों तनुज बैश्य व अंजलि सिंह के साथ चंदेरी पहुंची थी। सभी आरोपी स्थानीय किला कोठी में ठहरे थे।

इसी दौरान उनकी मुलाकात चंदेरी के स्थानीय युवकों जयकुमार कोली, विजय कुमार दुबे, ऋतिक शर्मा और राघव सोनी से हुई। आरोपियों ने इन युवकों को मंत्रालय में अच्छी सैलरी वाली सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और विश्वास में लेकर प्रक्रिया शुरू की।

नौ लाख अस्सी हजार रुपए की नकदी ऐंठी

ठगों ने प्रत्येक उम्मीदवार से लगभग 3 लाख रुपए की मांग की थी। सरकारी नौकरी की उम्मीद में इन चार युवकों ने कुल 9 लाख 80 हजार रुपए नकद आरोपियों को सौंप दिए। इसके साथ ही नौकरी से जुड़े उनके मूल दस्तावेज भी ले लिए गए।

रकम मिलने के बाद जब काफी समय तक नौकरी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और न ही कोई नियुक्ति पत्र मिला, तो पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ितों ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू की और अब मुख्य आरोपी को दबोच लिया गया है।