शिवपुरी जिले में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन की खेती का दायरा इस बार काफी बढ़ गया है। कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जिले में सोयाबीन का रकबा बढ़कर 65 हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 45 हजार हेक्टेयर दर्ज किया गया था।

बंपर पैदावार की उम्मीद, पर असमंजस बरकरार

रकबे में बढ़ोतरी के साथ ही इस बार मौसम अनुकूल रहने से प्रति एकड़ 5 से 6 क्विंटल तक बंपर पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए पंजीयन की प्रक्रिया 3 अक्टूबर से शुरू कर दी गई है जो आगामी 17 अक्टूबर तक जारी रहेगी। बावजूद इसके, शासन स्तर से वास्तविक खरीदी की तिथि घोषित न किए जाने से किसानों में संशय बना हुआ है।

एमएसपी में बढ़ोतरी और योजना का गणित

सरकार द्वारा 'प्राइस डेफिसिट पेमेंट स्कीम' यानी भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत सोयाबीन के मॉडल भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के बीच के अंतर की भरपाई किसानों को की जाती है। इस बार केंद्र सरकार ने सोयाबीन का एमएसपी 5,708 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो बीते वर्ष के 5,328 रुपए से 380 रुपए अधिक है।

सीधे समर्थन मूल्य पर खरीदी की मांग

भावांतर योजना की जटिल कार्यप्रणाली और भुगतान मिलने में होने वाली देरी के चलते किसान संगठन नाखुश नजर आ रहे हैं। अन्नदाताओं का तर्क है कि भावांतर के स्थान पर सरकार को सीधे समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी करनी चाहिए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन की व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों और एमपी किसान ऐप के माध्यम से पूरी तरह निःशुल्क रखी गई है। वहीं, एमपी ऑनलाइन कियोस्क, सीएससी और निजी सायबर कैफे से पंजीयन कराने पर 50 रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया है।