शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाले नरवर कस्बे के कोटिया मोहल्ले में उस वक्त हलचल मच गई, जब एक दुर्लभ वन्यजीव पैंगोलिन अचानक एक घर के अंदर जा घुसा। यह घटना रविवार रात करीब 10 बजे की है, जिससे स्थानीय रहवासियों में थोड़ी देर के लिए असमंजस की स्थिति बन गई।
सर्पमित्र और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई
घर में अजीबोगरीब जीव के घुसने की सूचना तुरंत स्थानीय सर्पमित्र सलमान पठान और वन विभाग को दी गई। जानकारी मिलते ही प्रशासनिक और बचाव दल तत्काल मौके पर पहुंचा। टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए पैंगोलिन को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया।
खतरा भांपते ही गेंद की तरह गोल हो जाता है 'चींटीखोर'
मौके पर मौजूद सर्पमित्र सलमान पठान ने बताया कि इस जीव को स्थानीय भाषा में 'चींटीखोर' भी कहा जाता है। इसके शरीर पर कड़े और धारदार शल्क होते हैं, जो इसकी रक्षा करते हैं। खास बात यह है कि किसी भी प्रकार का खतरा महसूस होते ही यह पैंगोलिन अपने शरीर को एक गेंद के आकार में पूरी तरह सिकोड़ लेता है। भारतीय पैंगोलिन मुख्य रूप से निशाचर होते हैं यानी रात में सक्रिय रहते हैं और इनका मुख्य आहार चींटियां तथा दीमक होते हैं।
संरक्षित श्रेणी का दुर्लभ वन्यजीव है पैंगोलिन
विशेषज्ञों के अनुसार पैंगोलिन एक बेहद दुर्लभ और वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत संरक्षित प्राणी है। दुनिया के कई हिस्सों में इसके शल्कों और अन्य अंगों की अवैध तस्करी के चलते इस प्रजाति का अस्तित्व खतरे में है, जो पर्यावरणविदों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
ग्रामीणों और रहवासियों से की गई अपील
घटनास्थल पर पैंगोलिन को देखने के लिए स्थानीय लोगों की खासी भीड़ जमा हो गई थी। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सर्पमित्र और वन कर्मियों ने जनता से अपील की कि वे ऐसे बेजुबान और वन्य जीवों को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाएं। अधिकारियों ने हिदायत दी कि यदि आबादी वाले क्षेत्र में कोई भी जंगली जानवर दिखाई दे, तो आम नागरिक खुद उसे पकड़ने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को इसकी सूचना दें। अंत में पकड़े गए पैंगोलिन को प्राकृतिक वास के अनुकूल सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!