शिवपुरी जिले के नरवर इलाके के अंतर्गत आने वाले सड़खड़पुर गांव के निवासी और भारतीय सेना के हवलदार राजेश यादव का सोमवार को पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। बेंगलुरु आर्मी बेस में शनिवार की सुबह ड्यूटी के दौरान बिजली के तार की चपेट में आने से उनका निधन हो गया था, जिसके बाद सोमवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा।

गांव में निकाली गई तिरंगा यात्रा

शहीद हवलदार का पार्थिव शरीर सबसे पहले विमान के जरिए दिल्ली लाया गया और वहां से एंबुलेंस द्वारा ग्वालियर आर्मी बेस पहुंचाया गया। इसके बाद सेना के वाहनों के माध्यम से इसे मगरौनी लाया गया, जहां से सड़खड़पुर गांव तक लगभग 10 किलोमीटर लंबी अंतिम यात्रा निकाली गई। इस दौरान बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिकों ने हाथों में तिरंगा थामकर नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

बेटे ने दी मुखाग्नि, सेना ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

गांव में पार्थिव शरीर के पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सेना के जवानों ने दिवंगत जवान को शस्त्र उल्टे कर गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरी सैन्य परंपरा के साथ अंतिम विदाई की रस्में निभाई गईं। राजेश यादव के 12 वर्षीय पुत्र आयुष यादव ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी।

आंधी के दौरान टूटकर गिरा था बिजली का तार

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, 33 वर्षीय राजेश यादव की तैनाती पिछले एक साल से बेंगलुरु आर्मी बेस में थी। शुक्रवार की रात बेंगलुरु में तेज आंधी चली थी, जिसके कारण छावन क्षेत्र में बिजली का तार टूटकर नीचे गिर गया था। शनिवार की सुबह करीब चार बजे जब वह अपने कार्य के लिए निकले, तब वे इस टूटे हुए तार की चपेट में आ गए और मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े। साथी सैनिकों द्वारा उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

वर्ष 2008 में भारतीय सेना की सेवा में शामिल हुए राजेश यादव ने बेंगलुरु से पूर्व कश्मीर जैसे कठिन इलाकों में भी अपनी सेवाएं दी थीं। वे दो भाइयों में से एक थे और उनके परिवार में 12 साल के बेटे के अलावा 7 साल की एक बेटी है, जो अपनी मां और दादा-दादी के साथ गांव में ही निवास करते हैं। उनकी शहादत की सूचना मिलने के बाद से ही सड़खड़पुर और आसपास के पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।