शिवपुरी शहर के व्यस्त झांसी तिराहे पर स्थित गांधी पेट्रोल पंप और नगर पालिका के बीच भूमि स्वामित्व को लेकर चल रहा पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। उच्च न्यायालय से मुकदमा जीतने के बावजूद निर्धारित समय सीमा में जमीन खाली न कराए जाने पर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।

क्या है 1960 की लीज और कानूनी लड़ाई का इतिहास

इस विवाद की शुरुआत वर्ष 1960 में हुई थी, जब नगर पालिका ने मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स के पक्ष में झांसी तिराहे के पास की इस जमीन की 25 साल की लीज तय की थी। उस समय इसके लिए 4472 रुपये प्रीमियम और 279.50 रुपये सालाना किराया तय किया गया था। इसी स्थल पर बाद में पेट्रोल पंप स्थापित किया गया, जिसका संचालन वर्तमान में समीर गांधी द्वारा किया जा रहा है। लीज की मियाद पूरी होने और उसका नवीनीकरण न कराए जाने के बावजूद इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा बरकरार रहा, जिसके बाद नगर पालिका ने कानूनी रास्ता अपनाया।

पिछले महीने उच्च न्यायालय का फैसला नगर पालिका के पक्ष में आने के बाद कार्रवाई की उम्मीद जगी थी। इसके तहत नगर पालिका द्वारा गत 22 सितंबर को एक अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में 10 दिन के भीतर यानी 2 अक्टूबर तक जमीन खाली करके पालिका को सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए थे। साथ ही तय अवधि में कब्जा नहीं हटाने पर बलपूर्वक बेदखली और हर्जाना वसूलने की चेतावनी भी दी गई थी, मगर डेडलाइन गुजर जाने के बाद भी जमीन खाली नहीं कराई जा सकी।

नपा अध्यक्ष ने सीएमओ पर लगाए गंभीर आरोप

मामले को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने प्रेसवार्ता कर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) यशवंत राठौड़ की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर सीएमओ पर पेट्रोल पंप संचालक से मिलीभगत होने और नगर पालिका के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप मढ़ा है। अध्यक्ष का कहना है कि कौड़ियों के भाव लीज पर दी गई इस भूमि की आज बाजार में कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है।

अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने दावा किया कि यदि किराए और कानूनी खर्च समेत पूरा हिसाब लगाया जाए, तो नगर पालिका को करीब 2 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जिससे संस्था की आर्थिक स्थिति मजबूत होती।

अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस विषय में सीएमओ से पत्राचार करने का प्रयास किया, लेकिन उनके द्वारा फोन तक रिसीव नहीं किया जा रहा है। उनका तर्क है कि जानबूझकर देरी की जा रही है ताकि संचालक को सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करने का अवसर मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि प्रशासन चाहे तो 5 अक्टूबर तक हर हाल में जमीन का आधिपत्य वापस लिया जा सकता है।

पेट्रोल पंप संचालक का पक्ष और आगे की कानूनी स्थिति

नपा अध्यक्ष के इन तमाम आरोपों के संबंध में जब सीएमओ यशवंत राठौड़ से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। वहीं दूसरी तरफ, पेट्रोल पंप संचालक समीर गांधी ने स्पष्ट किया है कि यह कानूनी मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन पहुंच चुका है।

संचालक समीर गांधी ने जानकारी दी कि नगर पालिका की ओर से इस प्रकरण में पूर्व में ही केविएट दाखिल की जा चुकी है और मामले की अगली सुनवाई आगामी 6 अक्टूबर को नियत है। उनका कहना है कि चूंकि मामला शीर्ष अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए सभी संबंधित पक्षों को कानून की मर्यादा के भीतर रहकर ही आगे की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।