शिवपुरी जिले में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन अब सक्रिय हो गया है। इसी कड़ी में साइबर ठगी की वारदातों में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की तकनीकी पड़ताल के आधार पर खनियाधाना और मायापुर थानों में दो नए आपराधिक मामले पंजीबद्ध किए गए हैं।

खुद को पुलिस अधिकारी बताकर की इक्यावन हजार की धोखाधड़ी

खनियाधाना थाने की पुलिस ने मोबाइल नंबर 6232378702 की गहराई से जांच की। साइबर पुलिस मुख्यालय से प्राप्त रिकॉर्ड के मुताबिक, इस नंबर का उपयोग करके महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी अजिंक्या प्रकाश माली को कॉल किया गया था। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए पीड़ित पर दबाव बनाया और विभिन्न ट्रांजेक्शन के जरिए 51,600 रुपए अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा लिए।

पड़ताल के दौरान यह मोबाइल नंबर मजरा फुटेरा, ग्राम मुहारीखुर्द निवासी 71 वर्षीय रामरतन लोधी पुत्र बाघराज लोधी के नाम पर रजिस्टर्ड पाया गया। पुलिस ने सिम उपलब्ध कराने वाले पीओएस एजेंट से भी बयान लिए, जिससे सिम जारी होने की पुष्टि हुई। इसी नंबर के जरिए तमिलनाडु के थूथुकुडी के रहने वाले महेश्वरन से जुड़ी एक अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत भी सामने आई थी।

मायापुर क्षेत्र में भी सामने आया पांच हजार की ठगी का मामला

दूसरी कार्रवाई मायापुर थाना क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस ने मोबाइल नंबर 7999120858 की जांच पूरी की। यह नंबर गुजरात के नवसारी जिले के बिलिमोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज साइबर ठगी के एक मामले से जुड़ा हुआ था। पीड़ित ने 12 जून 2026 को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात कॉलर ने उसके बैंक खाते से बिना अनुमति के चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से 5,100 रुपए पार कर दिए।

जांच में यह सिम कार्ड ग्राम पायगा (कुटियाटोर) निवासी राममिलन लोधी पुत्र खलक सिंह लोधी के नाम पर एक्टिव मिली। पुलिस ने पीओएस एजेंट मुकेश तिवारी के साथ-साथ सिम धारक राममिलन से भी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान राममिलन नंबर के उपयोग और ठगी की इस घटना को लेकर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका।

बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुए मुकदमे

दस्तावेजी सबूतों और पूछताछ के तथ्यों के आधार पर पुलिस ने दोनों मामलों में कड़े कदम उठाए हैं। खनियाधाना और मायापुर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत मुकदमे दर्ज कर लिए हैं।

फिलहाल स्थानीय पुलिस दोनों प्रकरणों में इन मोबाइल नंबरों के जरिए हुई ठगी की रकम के प्रवाह और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की संलिप्तता की बारीकी से जांच कर रही है।