शिवपुरी शहर में बुधवार दोपहर के समय लगभग आधे घंटे तक हुई झमाझम बारिश के बाद लोगों को पिछले कुछ दिनों से परेशान कर रही उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है। इस अल्पकालिक बरसात के दौरान शहर की प्रमुख सड़कों पर पानी जमा हो गया और कुछ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन गई।
पिछले साल के मुकाबले इस बार बारिश का ग्राफ काफी नीचे
स्थानीय मौसम और भू-अभिलेख विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, जिले में इस सीजन में मानसून की रफ्तार धीमी रही है। एक जून से लेकर पांच अगस्त 2026 तक की अवधि में जिले में औसतन केवल 292.36 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है। जबकि बीते वर्ष इसी समयावधि में जिले में 1040.48 मिलीमीटर औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई थी, जो वर्तमान आंकड़ों से बेहद अधिक है।
तुलना करें तो जिले की कुल सामान्य औसत वर्षा का पैमाना 816.3 मिलीमीटर है, जबकि बीते पूरे मानसून सत्र के दौरान कुल 1585.86 मिलीमीटर पानी बरसा था। इस बार इन आंकड़ों की तुलना में बारिश काफी पीछे चल रही है।
अटल सागर (मड़ीखेड़ा) बांध में जलस्तर की स्थिति
मानसून की बेरुखी का सीधा असर जिले के सबसे बड़े जल स्रोत अटल सागर बांध, जिसे मड़ीखेड़ा बांध भी कहा जाता है, पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। सिंध परियोजना की पांच अगस्त की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, इस विशाल बांध में इस समय 488.63 मिलियन घनमीटर जल का भंडारण है।
यह मात्रा इस बांध की कुल जल ग्रहण क्षमता 834.83 मिलियन घनमीटर का लगभग 58.53 प्रतिशत बैठती है, और वर्तमान में बांध का जलस्तर 339.70 मीटर मापा गया है।
बीते साल अगस्त के पहले हफ्ते में ही लबालब हो गया था बांध
चार अगस्त 2025 को मड़ीखेड़ा बांध में 622.69 मिलियन घनमीटर पानी मौजूद था, जो इसकी कुल क्षमता का 74.59 प्रतिशत था। उस दौरान लगातार हो रही बारिश से आवक बनी हुई थी और अगस्त के शुरुआती दिनों में ही बांध लगभग भर गया था।
बुधवार को हुई स्थानीय बारिश ने भले ही आमजन को कुछ पलों के लिए राहत दी हो, परंतु जिले में और अधिक मानसूनी गतिविधियों की दरकार है। जब तक आने वाले दिनों में क्षेत्र में झमाझम और निरंतर बारिश का दौर शुरू नहीं होता, तब तक जल संकट और बांध के स्तर को लेकर चिंता बनी रह सकती है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!