शिवपुरी जिले के खनियांधाना कस्बे में आत्मशुद्धि, साधना और क्षमा के पावन पर्व पर्युषण का समापन धार्मिक उल्लास के बीच हुआ। इस दौरान सकल दिगंबर जैन समाज ने अंतिम दिन हर्षोल्लास के साथ एक विशाल शोभायात्रा का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

चिंतामणि धाम मंदिर से शुरू हुई यात्रा

यह भव्य शोभायात्रा स्थानीय श्री श्री 1008 चिंतामणि धाम जैन बड़ा मंदिर से आरंभ हुई। इस दौरान आकर्षक रूप से सजाए गए रथों और चांदी के विमानों में श्रीजी को विराजमान कर पूरे नगर में भ्रमण कराया गया। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन के लिए मौजूद रही।

नगर के निवासियों ने अपने घरों के सामने सुंदर रंगोलियां सजाईं और रास्तों पर फूल बिछाकर शोभायात्रा का गर्मजोशी से स्वागत किया। जैसे ही विमान और रथ पहुंचे, स्थानीय लोगों ने श्रद्धाभाव से आरती उतारी।

बैंड-बाजों की धुन पर झूमे युवा

इस धार्मिक आयोजन में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रावकों ने पूरी आस्था के साथ श्रीजी के समक्ष चंवर ढुराया। वहीं, बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर युवा झूमते हुए नजर आए और गूंजते भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

मंदिर में हुए विशेष अनुष्ठान

विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए यह शोभायात्रा वापस चिंतामणि धाम जैन बड़ा मंदिर पहुंची, जहां इसका समापन किया गया। मंदिर परिसर में इसके बाद विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए, जिसमें विद्वान आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच श्रीजी का जलाभिषेक और शांतिधारा विधान किया गया।

दस दिनों तक चले इस पर्युषण पर्व के दौरान विभिन्न आराधना और अनुष्ठान हुए। अंत में जैन समाज ने संयम, साधना और क्षमावाणी पर्व के साथ इन दस दिवसीय आयोजनों को पूर्ण किया।