शिवपुरी जिले में नगरीय प्रशासन विभाग के निलंबित अधिकारी अमरसत्य गुप्ता एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप है कि विभाग द्वारा 7 सितंबर 2026 को निलंबित किए जाने के बावजूद उन्होंने कई सरकारी आदेश जारी किए। इन आदेशों में कर्मचारियों के प्रमोशन, समयमान वेतनमान और करीब 57 नगरीय निकायों से जुड़े कर संबंधी निर्देश शामिल बताए जा रहे हैं।

लोकायुक्त में की गई 54 पन्नों के दस्तावेजों के साथ शिकायत

इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए आरटीआई कार्यकर्ता माखन सिंह धाकड़ ने लोकायुक्त कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत के समर्थन में उन्होंने 54 पन्नों का एक विस्तृत शपथ-पत्र और तमाम पुख्ता दस्तावेज भी सौंपे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने 29 सितंबर को एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है, जिसे आगामी 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

नियुक्तियों और पदोन्नति में गड़बड़ी का भी दावा

शिकायतकर्ता ने अपनी अर्जी में केवल निलंबन के बाद आदेश जारी करने का ही मुद्दा नहीं उठाया है, बल्कि विभिन्न सरकारी नियुक्तियों, अनुकंपा नियुक्तियों और कर्मचारियों की पदोन्नति में भी नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा कई अन्य सरकारी मामलों में भी वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताएं बरते जाने का दावा किया गया है।

भिंड घोटाले के चलते पहले से ही निलंबित चल रहे हैं अधिकारी

उल्लेखनीय है कि आरोपी अधिकारी अमरसत्य गुप्ता को इससे पहले भिंड नगरपालिका के दौरान हुए निर्माण कार्यों के घोटाले की जांच को लंबित रखने और उच्च अधिकारियों द्वारा मांगे गए मामलों में संतोषजनक जवाब न देने के कारण निलंबित किया गया था। वह पहले से ही विभागीय कार्रवाई का सामना कर रहे थे।

अब गठित की गई चार सदस्यीय समिति लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों, निलंबन अवधि में जारी कथित आदेशों और अन्य तमाम बिंदुओं की गहराई से जांच करेगी। समिति की यह जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस पूरे प्रकरण में आगे की स्थिति और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो पाएगी।