शिवपुरी के व्यस्त झांसी तिराहे पर स्थित गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर चल रहा पुराना विवाद सोमवार को उस समय और गहरा गया जब नगर पालिका अध्यक्ष जेसीबी और डंपर लेकर मौके पर पहुंच गईं। जमीन को खाली कराने के प्रयास के दौरान उस समय हंगामा मच गया जब पेट्रोल पंप के कर्मचारी विरोध जताते हुए जेसीबी मशीन के आगे लेट गए।

अमले की गैरमौजूदगी पर उठे सवाल

इस पूरी कार्रवाई के दौरान नगर पालिका का पूरा अमला और मुख्य नगर पालिका अधिकारी यशवंत राठौड़ मौके पर मौजूद नहीं थे। इस स्थिति पर नपा अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने प्रशासनिक सहयोग न मिलने पर खुलकर सवाल उठाए। हालांकि, यह भी सामने आया कि कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले सीएमओ की ओर से पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए एक पत्र लिखा गया था, लेकिन सोमवार को मौके पर पुलिस बल नहीं दिखा।

नपा अध्यक्ष और संचालक का पक्ष

नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा का कहना है कि उच्च न्यायालय ने नगर पालिका के पक्ष में फैसला सुनाया है और कई बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जमीन खाली नहीं की जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन आम और छोटे लोगों पर तो तुरंत कार्रवाई कर देता है, लेकिन रसूखदारों और भूमाफियाओं के मामलों में ढिलाई बरती जाती है।

दूसरी ओर, पेट्रोल पंप के संचालक समीर गांधी का तर्क है कि यह कानूनी मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुका है और आगामी 6 अक्टूबर को इस पर पहली सुनवाई होनी है। उनका कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन होने के कारण सभी पक्षों को कानूनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।

साल 1960 में तय हुई थी लीज

स्थानीय निकाय के दस्तावेजों के अनुसार, झांसी तिराहे की यह जमीन वर्ष 1960 में मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को 25 वर्षों के लिए लीज पर दी गई थी। उस समय इसके एवज में 4,472 रुपये प्रीमियम और 279.50 रुपये सालाना किराया तय किया गया था। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद जमीन का आधिपत्य वापस न मिलने के कारण यह विवाद लंबे समय से खिंचता आ रहा है।