शिवपुरी जिले के कोलारस इलाके में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत संचालित एक शासकीय उचित मूल्य दुकान में गंभीर अनियमितताओं का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा किए गए औचक सत्यापन के दौरान यह अनियमितता सामने आई, जिसके बाद अब आगे की विभागीय जांच तेज कर दी गई है।
ग्रामीणों ने की थी एसडीएम से तीखी शिकायत
दीघोद गांव के रहवासियों ने कुछ समय पहले कोलारस के एसडीएम के समक्ष इस बात की शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें पिछले तीन-चार महीनों से लगातार राशन नहीं दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर चक्काजाम करेंगे।
ग्रामीणों की इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अमले ने तत्काल कार्रवाई की। नायब तहसीलदार के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने दीघोद स्थित उक्त राशन दुकान पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की।
मशीन में 70 क्विंटल तो दुकान में मिला मात्र 16.5 क्विंटल अनाज
जब अधिकारियों ने इलेक्ट्रॉनिक पीओएस मशीन के आंकड़ों की पड़ताल की, तो उसमें कुल 70 क्विंटल अनाज का स्टॉक दर्ज होना पाया गया। हालांकि, जब दुकान के भीतर असल स्टॉक की गिनती की गई, तो स्थिति बिल्कुल अलग थी।
मौके पर केवल 8.5 क्विंटल गेहूं और 8 क्विंटल चावल यानी कुल मिलाकर 16.5 क्विंटल अनाज ही भौतिक रूप से उपलब्ध मिला। इस प्रकार, कागजी रिकॉर्ड और असल माल में 53.5 क्विंटल का भारी अंतर दर्ज किया गया।
सेल्समैन पर लगे गंभीर आरोप, प्रशासन ने मांगा जवाब
जांच के समय मौजूद स्थानीय नागरिकों ने दुकान के सेल्समैन दिलीप जाटव पर गरीबों का हक मारने और लंबे समय से कोटे की कालाबाजारी करने के गंभीर आरोप लगाए। अधिकारियों ने इन सभी बयानों और साक्ष्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए मौके पर ही पंचनामा तैयार किया।
कोलारस के एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने मीडिया को जानकारी दी है कि मशीन के आंकड़ों और मौके के स्टॉक में बड़ा फर्क मिला है। इस मामले में संबंधित पक्ष और सेल्समैन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जा रहा है, और प्राप्त होने वाले स्पष्टीकरण के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!