चोरी के एक बड़े मामले में पूछताछ के नाम पर हिरासत में लिए गए फिजिकल ट्रेनर मोनू रजक को शनिवार की रात करीब नौ बजे पुलिस ने छोड़ दिया। रिहाई के तुरंत बाद परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उसके हाथ-पैर में गंभीर चोट के निशान और पैरों पर साफ सूजन दिखाई दी।

कार में बैठाकर ले जाने और बेहोश होने तक पीटने का आरोप

पीड़ित ट्रेनर मोनू रजक के अनुसार, इस चोरी के सिलसिले में पुलिस उससे पहले भी पूछताछ कर चुकी थी। इस बार पुलिसकर्मी उसे गाड़ी में बैठाकर सुभाषपुरा थाने ले गए और वहां ले जाकर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। मोनू का कहना है कि टॉर्चर के दौरान वह दर्द के मारे बेहोश भी हो गया था और होश में आने पर उस पर चोरी कबूलने का दबाव बनाया गया।

ट्रेनर ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस चोरी की इस घटना को पारदी गैंग से जोड़ने की योजना बना रही थी। जब उसने इस बात को मानने से मना कर दिया, तो उसके साथ और ज्यादा मारपीट की गई।

घटना की रात का ब्योरा और पत्नी का बयान

अपनी सफाई में मोनू ने बताया कि वारदात वाली रात उसकी पत्नी मायके गई हुई थी। वह शाम को घर लौटने के बाद सो गया था और रात नौ बजे किसी के फोन करने पर गुना बायपास की तरफ गया था। इसके बाद वह वापस आकर सो गया था। उसे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि चोरी कब और किसने की।

मोनू की पत्नी रजनी रजक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के उनके पति को प्रताड़ित किया गया है। परिवार ने न्याय के लिए अब अदालत की शरण लेने का मन बना लिया है।

थाना प्रभारी ने आरोपों को नकारा

दूसरी ओर, मामले में पुलिस का पक्ष रखते हुए थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ ने बताया कि मातादीन अग्रवाल और उनकी पत्नी ने मोनू पर चोरी का शक जताया था। उन्होंने यह भी धमकी दी थी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे जान दे देंगे। पुलिस के मुताबिक, घटना की रात मोनू की संदिग्ध गतिविधियों और उसके बयानों में विरोधाभास मिलने के कारण ही उसे पूछताछ के लिए लाया गया था, जबकि मारपीट के सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं।