शिवपुरी जिले के पिछोर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बामौरकलां में नवनिर्मित उप तहसील भवन की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से बने इस शासकीय भवन का उद्घाटन हुए अभी पखवाड़ा ही बीता है कि इसकी दीवारों और फर्श में खामियां सामने आने लगी हैं।

31 अगस्त को हुआ था भव्य लोकार्पण

खनियाधाना तहसील के बामौरकलां गांव में इस नए उप तहसील कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया था। बीते 31 अगस्त को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसका औपचारिक लोकार्पण किया था। इस उद्घाटन समारोह में पिछोर विधायक प्रीतम लोधी के साथ-साथ जिले के कलेक्टर, एसपी और अन्य प्रशासनिक अमला भी उपस्थित था।

उद्घाटन के समय इस इमारत की साज-सज्जा और कार्य को देखकर केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने इसकी तारीफ की थी और इसे सुंदर व आधुनिक बताते हुए प्रशासन को बधाई दी थी। लेकिन यह सराहना केवल पखवाड़े भर ही टिक पाई और इसके बाद भवन की असलियत सामने आ गई।

महज 15 दिन में दिखने लगीं दरारें और धंसा फर्श

लोकार्पण के मात्र 15 दिन बाद ही सामने आई तस्वीरों ने निर्माण कार्यों के दावों की पोल खोल दी है। इस नए भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें साफ दिखाई दे रही हैं, वहीं कई स्थानों पर कमरे का फर्श भी नीचे की ओर धंस गया है। इतनी जल्दी भवन का इस स्थिति में पहुंचना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

कांग्रेस नेता ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पिछोर विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी रहे अरविंद लोधी ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिला कलेक्टर को इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है और पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

कांग्रेस नेता का कहना है कि भारी-भरकम राशि खर्च होने के बावजूद यदि उद्घाटन के तुरंत बाद भवन जर्जर होने लगे, तो यह साफ तौर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने दोषियों और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है।

प्रशासनिक पक्ष और सुधार के निर्देश

दूसरी ओर, खनियाधाना के तहसीलदार निशिकांत जैन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि तहसील कार्यालय द्वारा अभी तक इस भवन का आधिकारिक तौर पर कब्जा नहीं लिया गया है।

तहसीलदार ने यह भी जानकारी दी कि भवन में सामने आई इन सभी कमियों को दुरुस्त करने के लिए संबंधित एसडीओ और निर्माण एजेंसी के ठेकेदार को सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की ओर से एक महीने के भीतर सभी तकनीकी और निर्माण संबंधी खामियों को ठीक कराए जाने का आश्वासन दिया गया है।