स्थानीय जिला कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी के जिलाध्यक्ष मोहित अग्रवाल ने शहर की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका को घेरा। इस दौरान मुख्य रूप से 115 करोड़ रुपए की लागत वाले सीवर प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए।
सड़कें खोदकर छोड़ी गईं, हादसों का अंदेशा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए जिलाध्यक्ष ने कहा कि शहर में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर भारी-भरकम राशि खर्च कर दी गई, लेकिन इसके बावजूद नागरिकों की सीवर से जुड़ी परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं। जिन इलाकों में लाइनें डाली गईं, वहां खोदी गई सड़कों की मरम्मत ठीक ढंग से न किए जाने के कारण राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
दोषियों पर एफआईआर और वसूली की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि इस पूरे प्रोजेक्ट में बरती गई लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही, उनसे नुकसान की भरपाई के लिए राशि वसूलने और एफआईआर दर्ज करने की बात कही गई। यह भी उल्लेख किया गया कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इस सीवर प्रोजेक्ट की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे।
सिंध जल आवर्धन योजना और पेयजल संकट
बैठक में सिंध पानी सप्लाई योजना के क्रियान्वयन पर भी असंतोष जताया गया। आरोप लगाया गया कि योजना होने के बावजूद शहर के कई वार्डों में पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पाइपलाइनों में लीकेज, अवैध कनेक्शनों और पानी खींचने के लिए लगाए गए पंपों पर कार्रवाई न होने से अंतिम छोर के इलाकों में पानी का दबाव बेहद कम है।
इसके अलावा, शहर की सफाई व्यवस्था, ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरे के उचित निपटान में कमी, और सफाई कर्मचारियों के साथ संसाधनों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। नगर पालिका की नेता प्रतिपक्ष शशि शर्मा की मौजूदगी में आवारा मवेशियों, बाजारों में अतिक्रमण, खराब स्ट्रीट लाइट और बदहाल पार्कों को लेकर भी कड़े सवाल किए गए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!