श्योपुर जिले के अंतर्गत आने वाली काशीपुरा पंचायत के बालापुरा गांव में व्यवस्थाओं की बड़ी कमी देखने को मिली है। यहां सांप के काटने से जान गंवाने वाले रामनरेश गुर्जर के अंतिम संस्कार के दौरान परिजनों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

कीचड़ और खेतों से गुजरानी पड़ी अर्थी

अस्पताल से जब रामनरेश का शव उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो अचानक मौसम खराब हो गया और बारिश शुरू हो गई। श्मशान घाट तक जाने के लिए कोई पक्का मार्ग या सड़क नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों और शोकाकुल परिजनों को मजबूरी में खेतों के बीच से और घुटनों तक भरे कीचड़ से होते हुए अर्थी को कंधों पर ले जाना पड़ा।

टीनशेड के अभाव में भीग गई चिता की लकड़ी

गांव के श्मशान घाट पर टीनशेड या किसी अन्य प्रकार की छत की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण बारिश के बीच चिता की लकड़ियां पूरी तरह से गीली हो गईं। स्थिति इतनी विकट हो गई कि परिजनों को काफी देर तक बारिश थमने का इंतजार करना पड़ा।

गीली लकड़ियों के चलते अंततः परिजनों को लकड़ी पर डीजल छिड़कना पड़ा, तब जाकर कहीं अग्नि प्रज्वलित हो सकी और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जा सकी। इस अमानवीय हालात ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों में रोष, प्रशासन से लगाई गुहार

बारिश के मौसम में बालापुरा के निवासियों को हर बार इस प्रकार की गंभीर समस्याओं से जूझना पड़ता है, जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। उन्होंने जिला प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द से जल्द श्मशान घाट तक पक्के रास्ते का निर्माण कराया जाए और टीनशेड जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।