श्योपुर जिले में सोमवार को भाद्रपद शुक्ल दशमी यानी तेजा दशमी का पर्व पूरी आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष दिन पर लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में जिलेभर में धार्मिक कार्यक्रमों और मेलों का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।
विभिन्न ग्रामीण इलाकों में निकलीं सवारियां और उमड़ी भीड़
जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में तेजाजी महाराज की सवारियां निकाली गईं। इस दौरान कई प्रमुख स्थानों पर सर्पदंश या अन्य जहरीले जीवों के काटने से पीड़ित लोगों के बंध खोलने की पारंपरिक रस्में भी पूरी की गईं। ग्राम सामरसा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
सामरसा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान काली माता मंदिर के भगत काडूराम मीणा लाल चुनरी ओढ़कर जुलूस के साथ चंबल नदी तक पहुंचे और गहरे पानी में डुबकी लगाई। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस बार उनके गले में नाग नहीं आ पाया, जिसे लेकर चर्चा रही। नदी किनारे इस नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
दशकों पुरानी परंपरा और अन्य गांवों के आयोजन
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक सामरसा की यह परंपरा करीब 50 साल पुरानी है, जिसकी शुरुआत मंदिर के पुजारी कृष्णा महाराज ने की थी। बाद में इसे अन्य पुजारियों ने आगे बढ़ाया और पिछले 13 सालों से काडूराम मीणा इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। इसी प्रकार छोटाखेड़ा गांव में मावदा से झंडा लेकर पहुंचे लोगों ने तेजाजी महाराज के थानक पर परंपरा का पालन किया।
इकलौद गांव में आयोजित मेले में तेजाजी महाराज की स्मृति में निकाली गई सजी-धजी घोड़ी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। दोपहर के समय दीक्षित निवास से पारंपरिक रूप से घोड़ी की सवारी निकाली गई, जिसे आकर्षक वस्त्रों और आभूषणों से सजाया गया था।
दो दर्जन से अधिक स्थानों पर सजे मेले
तेजा दशमी के अवसर पर श्योपुर शहर के हजारेश्वर उद्यान और गिर्राज घाट के अलावा बड़ौदा, कराहल, मानपुर, इकलौद, रतोदन, मालीपुरा, सोईकलां, दांतरदा, बालापुरा, पांडोला, आवदा, राडेप, प्रेमसर, जावदेश्वर, ढोढर, रघुनाथपुर, गोरस, हीरापुर, लाडपुरा और गोठरा समेत आदिवासी अंचल के कई गांवों में मेले लगे।
इन सभी स्थानों पर आयोजित मेलों और धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने तेजाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चन की और मन्नतें मांगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!