श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक दृश्य सामने आया है। यहां मादा चीता निर्वा और उसका नन्हा शावक इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सामने आई एक तस्वीर में मां और बच्चे के बीच के गहरे जुड़ाव और वन्य जीवन के शुरुआती पाठ को साफ देखा जा सकता है।
मां की हर अदा को सीख रहा है शावक
वायरल हो रही इस तस्वीर में मादा चीता निर्वा जब अपना मुंह खोलती है, तो ठीक उसी अंदाज में उसका शावक भी अपनी छोटी सी गर्दन उठाकर मुंह खोलता नजर आता है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे मां अपने बच्चे को जंगल के कड़े संघर्षों और तौर-तरीकों की शिक्षा दे रही हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो के जंगलों में चीतों का यह आपसी व्यवहार उनके प्राकृतिक विकास का एक अहम हिस्सा है। शावक अपनी मां की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखते हैं और उनकी नकल कर के ही आगे चलकर कुशल शिकारी बनते हैं।
जंगल की दुनिया के कड़े पाठ
जंगल का यह खुला आसमान और घास के मैदान इन नन्हें मेहमानों के लिए एक खुली पाठशाला की तरह हैं। मां निर्वा अपने शावक को यह अहसास करा रही है कि इस अनजान और कठिन दुनिया में जीवित रहने के लिए उसे खुद को कितना मजबूत बनाना होगा।
मेरे लाल, जंगल की दुनिया आसान नहीं है। यहां अपनी रक्षा भी खुद करनी है और अपना शिकार भी अपने दम पर ही ढूंढना है।
मां की इस मूक सीख को नन्हा शावक भी पूरी शिद्दत से समझ रहा है। उसकी आंखों में भविष्य के एक ताकतवर शिकारी की चमक साफ देखी जा सकती है, जो यह विश्वास दिलाता है कि वह आने वाले समय में कूनो के जंगलों में पूरी शान से राज करेगा।
पर्यटकों और वन अधिकारियों में उत्साह
कूनो नेशनल पार्क में चीता परिवार की ऐसी गतिविधियां लगातार सामने आने से वन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ वन्यजीव प्रेमियों में भी भारी उत्साह है। यह इस बात का प्रमाण है कि श्योपुर के ये जंगल अफ्रीकी चीतों के अनुकूल साबित हो रहे हैं और यहां उनका कुनबा लगातार फल-फूल रहा है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!