पांचवें साल में प्रवेश के साथ बदली रणनीति
श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट को लेकर प्रबंधन ने अपनी प्राथमिकताओं में अहम बदलाव किए हैं। अब तक हर एक चीते पर चौबीस घंटे व्यक्तिगत निगरानी रखी जाती थी, लेकिन अब फोकस पूरे चीता कुनबे की सेहत, प्रजनन क्षमता और जंगल में इनकी आबादी के प्राकृतिक विस्तार पर केंद्रित किया जा रहा है।
अनावश्यक मानवीय दखल से मुक्त होंगे स्वस्थ चीता
नई कार्ययोजना के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जो चीते पूरी तरह स्वस्थ हैं और जंगल के माहौल में खुद को ढाल चुके हैं, उन्हें बिना किसी जरूरी कारण के इंसानी हस्तक्षेप का सामना न करना पड़े। इससे इन वन्यजीवों को अपना प्राकृतिक व्यवहार और सहज जीवन शैली विकसित करने का पूरा अवसर मिल सकेगा।
स्वस्थ और जंगल में स्थापित हो चुके चीतों को अनावश्यक मानवीय दखल से बचाते हुए उनके प्राकृतिक व्यवहार को पनपने का मौका दिया जाएगा।
विशेष परिस्थितियों में जारी रहेगी व्यक्तिगत निगरानी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि रणनीति में बदलाव का यह कतई अर्थ नहीं है कि चीतों की सुरक्षा या चिकित्सा देखभाल में कोई ढिलाई बरती जाएगी। बीमार या घायल जीवों, जंगल में हाल ही में छोड़े गए नए चीतों, तथा शावकों की शुरुआती परवरिश और प्रजनन के संवेदनशील दौर से गुजर रहे चीतों पर पहले की तरह ही विशेष और व्यक्तिगत निगरानी बनी रहेगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!