श्योपुर शहर के निषादराज भवन में बुधवार को पंच-सरपंच सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जो बाद में जनप्रतिनिधियों के तीखे विरोध का अखाड़ा बन गया। सम्मेलन के दौरान मंच से जब सांसद शिवमंगल सिंह तोमर अपनी उपलब्धियां गिना रहे थे, तभी वहां मौजूद स्थानीय प्रतिनिधियों ने गांवों में विकास कार्य ठप होने का मुद्दा उठा दिया।
सड़क निर्माण के दावों पर उप सरपंच ने उठाए सवाल
सांसद अपने संबोधन में सरकारी योजनाओं की प्रगति और क्षेत्र में 60 नई सड़कों की स्वीकृति मिलने का दावा कर रहे थे। इसी बीच पच्चीपुरा के उप सरपंच महेंद्र सिंह गुर्जर अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्होंने दावा किया कि उनके गांव में डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से अटका हुआ है। जैसे ही उप सरपंच ने विरोध जताते हुए मंच की ओर कदम बढ़ाए, वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और इसी गहमागहमी के बीच सांसद अपना भाषण समाप्त कर कार्यक्रम स्थल से चले गए।
बजट और मनरेगा कार्यों पर फूटा गुस्सा
सांसद के जाने के बाद पंचायत प्रतिनिधियों का आक्रोश और अधिक बढ़ गया और उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उपस्थित सरपंचों और पंचों का कहना था कि पहले से ही मनरेगा के तहत पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहे थे और अब नई योजनाओं के जरिए भी पंचायतों को किसी प्रकार का बजट आवंटित नहीं किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण इलाकों का विकास पूरी तरह बाधित हो गया है।
इस दौरान बर्धा के सरपंच कप्तान जाट ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांवों में साफ-सफाई के नाम पर आने वाला फंड धरातल पर सरपंचों तक पहुंच ही नहीं रहा है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं की सुस्ती को लेकर प्रतिनिधियों में खासा रोष देखा गया।
खान-पान की व्यवस्थाओं को लेकर भी जताया विरोध
विकास कार्यों की अनदेखी से उपजा यह गुस्सा केवल बैठकों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि सम्मेलन में की गई व्यवस्थाओं पर भी इसका असर दिखा। पंच-सरपंचों ने कार्यक्रम में परोसे गए नाश्ते की गुणवत्ता को लेकर भी तीखा ऐतराज जताया और आयोजकों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए। पूरे दिन चले इस सम्मेलन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नाराजगी के कारण माहौल गरमाया रहा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!