श्योपुर जिले में अनुसूचित जाति और आदिवासी वर्ग के लोगों की जमीनों पर अवैध कब्जे और उन पर दबंगों के दखल से जुड़े मामलों को लेकर अब प्रशासनिक अमला ही आमنے-सामने आ गया है। इस पूरे प्रकरण में स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
दो आईएएस अधिकारियों की रिपोर्ट में 151 मामलों का अंतर
उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान जिले के दो आईएएस अफसरों की रिपोर्ट में 151 प्रकरणों का भारी अंतर सामने आने से हड़कंप मच गया है। पूर्व कलेक्टर संजय कुमार ने 7 फरवरी 2024 को शासन को एक पत्र भेजा था, जिसमें 600 प्रकरण लंबित होने की बात कही गई थी। इसके उलट, वर्तमान कलेक्टर शीला दाहिमा की ओर से अदालत में पेश की गई रिपोर्ट में सिर्फ 449 प्रकरण ही दर्ज बताए गए हैं।
बीती 6 अक्टूबर को डब्ल्यूपी क्रमांक 5766/2025 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इन दोनों आईएएस अधिकारियों के परस्पर विरोधी रुख और प्रशासनिक विरोधाभास पर काफी तल्ख टिप्पणियां कीं। अदालत ने सवाल उठाया कि जब एक जिम्मेदार अधिकारी आधिकारिक पत्र में 600 मामलों का विवरण दे रहा है, तो दूसरे अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में स्थिति इतनी अलग कैसे हो सकती है। न्यायालय ने यह भी नाराजगी जताई कि वर्तमान प्रशासन ने पूर्व कलेक्टर से उनके आंकड़ों के आधार को लेकर कोई पूछताछ नहीं की।
उच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए गंभीर सवाल और राजस्व अमले की कार्यप्रणाली
सुनवाई के दौरान अदालत ने कलेक्ट्रेट और तहसील के लिपिकों की भूमिका पर भी संदेह जताया है। कोर्ट ने आशंका जताई है कि भू-माफियाओं और प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए जानबूझकर 151 फाइलों और प्रकरणों को पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया होगा, जिसकी तुरंत जांच होनी चाहिए।
अदालत ने पूर्व कलेक्टर के 7 फरवरी 2024 के उस पत्र का भी विशेष तौर पर उल्लेख किया, जिसमें तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों और पटवारियों की मिलीभगत से आदिवासियों के पट्टे और जमीन के रिकॉर्ड बदलने की बात कही गई थी। इस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि किस तरह राजस्व अमला सांठगांठ कर जमीनों पर अवैध कब्जे करवा रहा है।
सरकार ने मांगा समय, अब 21 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
न्यायालय के सख्त रुख के बाद राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता विवेक खेडकर ने पिछला जवाब वापस लेने की अनुमति मांगी। अब सरकार इन 151 फाइलों के गायब होने और आंकड़ों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए नए सिरे से जांच कर अपना विस्तृत जवाब पेश करेगी।
इस मामले में उच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पीड़ित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए राजस्व रिकॉर्ड की इस गड़बड़ी की तह तक जाया जाए। इस बहुचर्चित प्रकरण की अगली सुनवाई आगामी 21 अक्टूबर 2026 को तय की गई है, जिस पर पूरे अंचल की निगाहें टिकी हुई हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!