कलेक्ट्रेट गेट पर तीन घंटे तक डटे रहे अन्नदाता

श्योपुर जिले में सिंचाई के लिए पानी और खेती किसानी के वास्ते खाद की किल्लत से परेशान किसानों का गुस्सा शुक्रवार को फूट पड़ा। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंडला के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसानों ने स्थानीय कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ यह धरना दोपहर 3 बजे तक चला, जिसमें किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर आवाज उठाई।

सिंचाई और बुवाई पर मंडरा रहा संकट

प्रदर्शन के दौरान किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंडला ने बताया कि चंबल मुख्य दाहिनी नहर (आरएमसी) में समय पर पानी नहीं छोड़ा जा रहा है, जिससे धान की फसल जो कि पकने की आखिरी अवस्था में है, उसे भारी नुकसान की आशंका है। इसके अलावा आगामी रबी सीजन के तहत सरसों की बुवाई के लिए खेतों में पलेवा करने का काम भी पिछड़ रहा है। किसानों ने मांग की है कि आरएमसी नहर में जल्द से जल्द पर्याप्त पानी छोड़ा जाए ताकि फसलों को बचाया जा सके।

खाद की कालाबाजारी रोकने और अटैचमेंट खत्म करने की मांग

अन्नदाताओं ने डीएपी और यूरिया की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि किसानों को तय दरों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिलने चाहिए। साथ ही, खाद के साथ अन्य कृषि उत्पाद जबरन थमाने यानी अटैचमेंट की प्रथा पर तुरंत रोक लगाई जाए। किसानों ने जिले में खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की।

10 घंटे बिजली आपूर्ति की रखी मांग

धरने की सूचना मिलने पर एसडीएम बीएस श्रीवास्तव, डिप्टी कलेक्टर विजय शाक्य के अलावा जल संसाधन विभाग और खाद वितरण महकमे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की। इस दौरान किसानों ने कृषि कार्यों के वास्ते प्रतिदिन 10 घंटे निर्बाध बिजली देने की मांग भी प्रमुखता से रखी।

शनिवार से चक्का जाम की चेतावनी

अधिकारियों के समक्ष अपनी सभी मांगें रखने के बाद किसानों ने दो टूक कह दिया कि यदि समय रहते समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो वे शनिवार, 10 अक्टूबर से सड़कों पर उतरकर चक्का जाम आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।