श्योपुर जिले के इच्छनाखेड़ली गांव में आपसी विवाद के दौरान घायल हुए रामस्वरूप बैरवा की उपचार के दौरान मौत हो गई। कोटा में 21 अक्टूबर को उनकी सांसें थमने के बाद गुस्साए स्वजन ने गुरुवार की सुबह श्योपुर-सवाई माधोपुर मुख्य मार्ग पर शव रखकर आवागमन बाधित कर दिया।

तीन घंटे तक बाधित रहा यातायात

सड़क पर शव रखकर किए गए इस प्रदर्शन के कारण हाइवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जाम की सूचना मिलते ही मानपुर और देहात थाना पुलिस का बल तत्काल मौके पर पहुंच गया। हालात को संभालते हुए एसडीओपी ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्वजन से चर्चा की।

विधायक और पुलिस अधिकारियों की समझाइश

प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही स्थानीय विधायक बाबू जंडेल भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए 51 हजार रुपए की आर्थिक मदद देने की बात कही। पुलिस अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद करीब तीन घंटे चली मशक्कत के बाद जाम समाप्त हुआ।

फोन पर बातचीत से शुरू हुआ था विवाद

पुलिस के अनुसार यह पूरा विवाद 18 अक्टूबर की शाम अशोक बैरवा की पत्नी से फोन पर हुई बातचीत को लेकर उपजा था। अशोक ने बंटी बैरवा पर उसकी पत्नी से बात करने का शक जताया था, जिसके चलते रंजिश बढ़ गई। इसके बाद बंटी बैरवा और कमलेश बैरवा ने लाठी व तलवार से हमला बोल दिया था, जिसमें रामस्वरूप बैरवा और अन्य लोग भी बीच-बचाव व मारपीट में घिरे थे।

मानपुर थाने में इस मामले में पहले ही अपराध क्रमांक 205/26 दर्ज किया जा चुका है जिसमें बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई थी। रामस्वरूप की मौत के बाद अब पुलिस इस मामले में धाराओं को बढ़ाने और अन्य आरोपियों के नाम शामिल करने की प्रक्रिया में जुटी है।

एसडीओपी आनंद राय ने जानकारी दी है कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नामजद आरोपियों को रात में ही अपनी गिरफ्त में ले लिया है जिन्हें अब अदालत में पेश किया जाएगा। साथ ही, स्वजन के बयनों और आगे की जांच के आधार पर मामले में एक और आरोपी का नाम जोड़ा जाएगा।