पांच सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

श्योपुर जिले में अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समर्थन में पटवारियों ने मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश पटवारी संघ की स्थानीय तहसील इकाई के बैनर तले सभी पटवारी सोमवार से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे प्रशासनिक और राजस्व कामकाज पूरी तरह ठप होने के आसार बन गए हैं।

हड़ताल पर जाने से पहले पटवारी संघ की ओर से अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और तहसीलदार को लिखित सूचना सौंप दी गई थी। संघ के तहसील अध्यक्ष अशोक बिसारिया और सचिव विवेक जाटव का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर शासन स्तर पर कई बार ज्ञापन और विरोध प्रदर्शन किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।

ये हैं मुख्य मांगें

पटवारियों की प्रमुख मांगों में कैडर रिव्यू को जल्द लागू करना, समयमान वेतनमान और पदोन्नति का लाभ देना, तथा लंबे समय से अटके मानदेय एवं विभिन्न योजनाओं के भुगतानों का निपटारा शामिल है। इसके साथ ही, न्यायालयीन मामलों में पटवारियों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई की व्यवस्था में सुधार लाने और स्थानांतरण नीति के नियमों के विरुद्ध जाकर संघ के पदाधिकारियों के किए गए तबादलों को रद्द करने की मांग भी उठाई गई है।

चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया विरोध

अपनी मांगों के समर्थन में पटवारियों ने यह कदम उठाने से पहले चरणबद्ध आंदोलन चलाया था। विरोध की शुरुआत 20 से 23 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर की गई थी। इसके पश्चात 24 से 27 जुलाई के बीच शासकीय व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल समूहों से दूरी बनाई गई। वहीं 28 जुलाई से 2 अगस्त तक वेबजीआईएस तथा सारा ऐप समेत सभी प्रकार के ऑनलाइन कार्यों का पूरी तरह बहिष्कार किया गया था।

इस हड़ताल के कारण आम जनता और किसानों को नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी और राजस्व दस्तावेजों के अद्यतन जैसे जरूरी कार्यों के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। पटवारी संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी मांगों पर गौर नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।