श्योपुर जिले के कराहल तहसील कार्यालय परिसर में विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। विधायक क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के हितों, माता शबरी आश्रम की भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और किसानों की जमीनों से अतिक्रमण हटाने सहित कुल 20 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

धरना स्थल पर दिनभर विधायक के समर्थक और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। इस बीच, प्रशासनिक अधिकारी आंदोलन को समाप्त कराने के लिए लगातार बातचीत का प्रयास कर रहे हैं। विधायक मल्होत्रा ने इससे पहले राज्यपाल, मुख्यमंत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन में वर्ष 2018 में माता शबरी आश्रम को आवंटित भूमि से अवैध कब्जा हटाने की प्रमुख मांग शामिल है।

इसके अतिरिक्त, सिलपुरी, पनवाड़ा, खिरखिरी, पहेला, पर्तवाड़ा और कराहल जैसे गांवों में आदिवासी किसानों की भूमि का सीमांकन कर उन्हें उनका हक दिलाने, फर्जी भूमि पट्टों की जांच करने, कराहल सोसायटी में डीएपी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने और लंबित राजस्व प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने जैसी अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाई गई हैं।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और समाधान के प्रयास

शुक्रवार देर रात कराहल तहसीलदार नरेश रायपुरिया ने धरना स्थल पर पहुंचकर विधायक मुकेश मल्होत्रा से उनकी मांगों के प्रत्येक बिंदु पर विस्तृत चर्चा की। तहसीलदार ने बताया कि विधायक द्वारा उठाए गए कई मुद्दों का समाधान पूर्व में ही किया जा चुका है, जबकि शेष बचे मामलों की गहन जांच की जा रही है।

माता शबरी आश्रम की भूमि से जुड़े विवाद पर तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि दूसरे पक्ष की अनुपस्थिति के कारण सीमांकन का कार्य पूरा नहीं हो पाया था। उन्होंने आश्वस्त किया कि अब दोनों पक्षों को बुलाकर नियमानुसार भूमि का चिन्हांकन किया जाएगा। प्रशासन शनिवार को भी विधायक से संवाद स्थापित कर इस गतिरोध को समाप्त करने का प्रयास कर रहा है।

विधायक का दृढ़ संकल्प

दूसरी ओर, विधायक मुकेश मल्होत्रा अपनी सभी 20 मांगों को लेकर अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन इन सभी समस्याओं पर कोई ठोस और संतोषजनक कार्रवाई नहीं करता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। विधायक ने जोर देकर कहा कि यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के गरीब आदिवासियों, किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है, और वे अपनी सभी मांगें पूरी होने के बाद ही धरना समाप्त करेंगे।