श्योपुर जिले के कराहल स्थित सीडब्ल्यूसी परिसर में आयोजित 'सीएम जन विश्वास शिविर' उस समय चर्चा का विषय बन गया जब एक आदिवासी महिला ने प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया। संबल योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि का लंबे समय से भुगतान न होने के कारण महिला का सब्र टूट गया और उसने शिविर में मौजूद कलेक्टर की टेबल पर ही दस्तावेज फेंक दिए।
साल 2017 में हुई थी पति की मौत
यह पूरा मामला कराहल की जवाहर कॉलोनी में रहने वाली विद्या आदिवासी से जुड़ा है। महिला के पति गंगाराम आदिवासी का निधन वर्ष 2017 में हो गया था। मृतका की पत्नी का कहना है कि पति की मौत को आठ साल का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद उसे संबल योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता अब तक नसीब नहीं हुई है।
कलेक्टर ने हस्तक्षेप कर शांत कराया
अचानक हुए इस घटनाक्रम से शिविर स्थल पर कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए कलेक्टर शीला दाहिमा ने आगे बढ़कर महिला को ढांढस बंधाया और उसकी पूरी बात इत्मीनान से सुनी। महिला का गुस्सा शांत होने के बाद कलेक्टर ने जनपद सीईओ को इस प्रकरण की तत्काल प्रभाव से जांच करने और समस्या का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।
प्रशासन ने दी मामले की अंदरूनी जानकारी
शिविर में मौजूद अधिकारियों की ओर से पंचायत सचिव जगमोहन गुर्जर ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि विद्या आदिवासी को शासन की अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जिसके तहत उन्हें आवास योजना और विधवा पेंशन दी जा रही है। सचिव ने स्पष्ट किया कि संबल योजना के तहत राशि का भुगतान न होने की मुख्य वजह यह है कि जिस समय महिला के पति का निधन हुआ था, उस वक्त उनका पंजीयन संबल पोर्टल पर सक्रिय नहीं था।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!