मंगलवार को श्योपुर जिले में जलझूलनी एकादशी का पर्व अत्यंत उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर में एक विशाल डोल शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु शामिल हुए।

टोड़ी गणेश मंदिर से शुरू हुई यात्रा

यह धार्मिक यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए सबसे पहले टोड़ी गणेश मंदिर पहुंची। वहां से सभी देव विमान निर्धारित मार्ग से होते हुए बंजारा डैम की ओर रवाना किए गए। पूरे रास्ते में श्रद्धालुओं ने डोल और देव विमानों के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

अखाड़ों के उम्दा करतब और सुरक्षा व्यवस्था

शोभायात्रा के दौरान कुल 12 अखाड़े शामिल रहे, जिनके युवाओं ने लाठी, गतका और मुगदर चलाने के अलावा पारंपरिक साहसिक करतब दिखाए। कुछ युवाओं ने मुंह से आग उगलने और शरीर के ऊपर से मोटरसाइकिल निकलवाने जैसे हैरान कर देने वाले प्रदर्शन भी किए। इन करतबों को देखने के लिए सड़कों के दोनों तरफ भारी भीड़ जुटी रही।

कानून व्यवस्था और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे यात्रा मार्ग पर पुलिस बल मुस्तैद रहा। प्रशासन की टीमों के साथ-साथ आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए भी पूरी गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जाती रही।

बंजारा डैम पर पूरी हुई जलवा पूजन की रस्म

शाम ढलते-ढलते सभी देव विमान बंजारा डैम पर जा पहुंचे, जहां पारंपरिक विधि-विधान के साथ जलवा पूजन का कार्य पूरा किया गया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के करीब 18 दिन बाद आने वाले इस पर्व पर श्योपुर में भगवान को देव विमान में विराजमान कर जलस्त्रोत तक ले जाने की यह परंपरा बरसों से निभाई जा रही है।