अंचल में मंगलवार को विजय पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान शहर के मुख्य मेला मैदान में 52 फीट ऊंचे रावण और 45 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतले का दहन किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
भगवान श्रीराम के चल समारोह से हुई शुरुआत
पारंपरिक उत्सव का शुभारंभ शाम करीब चार बजे टोड़ी गणेश बाजार स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण मंदिर से हुआ। यहां से भगवान श्रीराम का भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें कलाकारों ने पारंपरिक अखाड़ेबाजी के करतब दिखाए और सुंदर झांकियां सजाई गईं।
चल समारोह के दौरान एक वाहन पर रावण, मेघनाद और उनके अन्य सहयोगी सवार थे जो श्रीराम की सेना पर प्रहार कर रहे थे। वहीं दूसरे वाहन पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूप विराजमान थे, जिनके बीच रास्ते में नाटकीय युद्ध का जीवंत प्रदर्शन किया गया।
मेला मैदान में हुआ पुतला दहन और आतिशबाजी
मुख्य बाजार से गुजरते हुए चल समारोह मेला मैदान पहुंचा। यहां प्रभु श्रीराम ने रावण की नाभि पर तीर चलाकर उसका वध किया। इसके तुरंत बाद पूरा परिसर 'जय श्रीराम' के जयकारों से गूंज उठा और आसमान रंग-बिरंगी आतिशबाजी से जगमगा उठा।
आतिशबाजी के इस रोमांचक माहौल के बीच बुराई के प्रतीक 52 फीट के रावण और 45 फीट के मेघनाद के पुतले आग के हवाले कर दिए गए, जो देखते ही देखते धू-धू कर जल उठे।
श्रीरामतलाई और ग्रामीण अंचलों में भी रहे कार्यक्रम
मुख्य बाजार से होते हुए चल समारोह जब श्रीरामतलाई पहुंचा, तब वहां महाआरती का आयोजन किया गया। यहां करीब 150 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए 15 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया।
केवल जिला मुख्यालय पर ही नहीं, बल्कि श्योपुर जिले के कराहल, बड़ौदा और विजयपुर कस्बों में भी विजयादशमी का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया और विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम संपन्न हुए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!