श्योपुर जिले के विजयपुर इलाके में स्थित घने जंगलों के बीच बसे जमूर्दी गांव के प्राचीन पार्वती माता मंदिर में सोमवार को एक दिवसीय वार्षिक मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए श्योपुर के अलावा आसपास के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे।
हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
सोमवार की सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। एक अनुमान के मुताबिक मेले में 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शिरकत की। दर्शनार्थियों ने माता के दरबार में पहुंचकर चुनरी, घंटे और नेजे अर्पित किए तथा अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मेले की शुरुआत से पहले रविवार की रात को मंदिर परिसर में भव्य जागरण का आयोजन किया गया था, जिसमें विभिन्न भजन मंडलियों ने देवी के गीत प्रस्तुत किए और भक्त पूरी रात वहीं जमे रहे।
विशेष परंपरा और सुरक्षा के कड़े प्रबंध
इस प्राचीन मेले की एक खास मान्यता के तहत सर्प दंश या अन्य जहरीले जीवों के काटने से पीड़ित सैकड़ों लोगों के बंध काटे गए। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि माता के दरबार में यह प्रक्रिया विष के प्रभाव को कम करती है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ऐसी स्थिति में चिकित्सीय सहायता लेना भी आवश्यक माना जाता है।
भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मेला स्थल और मुख्य मार्गों पर आधा दर्जन से ज्यादा थाना प्रभारियों के नेतृत्व में 100 से अधिक पुलिस बल तैनात किया गया था। ग्राम पंचायत जमूर्दी और मेला समिति के पदाधिकारी भी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में जुटे रहे।
सूर्यास्त से पहले खाली हो जाता है परिसर
मंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल शर्मा ने बताया कि इस स्थान की एक अनूठी परंपरा है जिसके तहत सभी दुकानदार और श्रद्धालु सूर्यास्त होने से पहले ही मंदिर परिसर छोड़कर वापस लौट जाते हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस स्थानीय मान्यता के अनुसार रात के समय यहां भूत-प्रेतों का वास होता है, जिसके चलते शाम ढलने के बाद कोई भी व्यक्ति मंदिर क्षेत्र में नहीं रुकता है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!