कूनो में चीतों की संख्या बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की आबादी को बढ़ाने के लिए वन विभाग ने कार्ययोजना तैयार की है। वर्तमान में पार्क के भीतर कुल 49 चीते मौजूद हैं, और इस साल इस संख्या को 80 तक ले जाने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया गया है। इस आंकड़े तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से नए शावकों के जन्म पर जोर दिया जा रहा है।
इन 10 मादा चीतों से बंधी हैं उम्मीदें
प्रशासन की रणनीति के अनुसार, पार्क की 10 मादा चीतों से इस वर्ष नए शावकों के जन्म की प्रबल संभावना है। इनमें हाल ही में बोत्सवाना से लाई गईं 6 मादा चीते भी शामिल हैं। इसके अलावा भारत की धरती पर जन्मी दो युवा मादाएं भी अब प्रजनन के लिए तैयार हैं। साथ ही, अपने पिछले शावकों से अलग हो चुकीं वीरा और निर्वा नामक मादाओं के भी दोबारा मां बनने की उम्मीद जताई जा रही है।
दूसरी ओर, कूनो में मौजूद चार अन्य मादा चीते—ज्वाला, आशा, गामिनी और मुखी—फिलहाल अपने छोटे शावकों की देखभाल में जुटी हैं। इन शावकों की उम्र एक साल से कम होने के कारण, नियमानुसार इन चारों मादाओं को अगले सात से आठ महीने तक अपने बच्चों के साथ ही रहना होगा। इस वजह से इस वर्ष इनसे नए प्रसव की संभावना नहीं है।
चार साल का सफर और अब तक की स्थिति
भारत में चीता पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट को शुरू हुए चार साल पूरे हो चुके हैं। इस अवधि के दौरान बाहर से लाए गए 26 चीतों से कुल संख्या बढ़कर 52 तक पहुंची थी। हालांकि, इस पूरे सफर में 25 चीतों की मौत भी हुई है, जिनमें 9 विदेशी और शेष भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। वर्तमान में देश की जमीन पर कुल 32 भारतीय जन्मे चीते दौड़ रहे हैं, जिनमें नामीबियाई मूल के 22 और दक्षिण अफ्रीकी मूल के 10 शावक भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो प्रबंधन के सामने केवल संख्या को 49 से 80 तक पहुंचाने का ही नहीं, बल्कि चुनिंदा मादाओं के जरिए जन्म लेने वाली नई पीढ़ी को सुरक्षित रखने की भी बड़ी चुनौती होगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!