श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क ने हाल ही में एक न्यूजलेटर जारी किया है, जिसका शीर्षक 'चीतों का प्रबंधन: कूनो का अनदेखा चमत्कार' है। इसमें प्रोजेक्ट चीता को सफल बनाने में जुटे 'गुमनाम नायकों' के संघर्ष और समर्पण की कहानियाँ सामने आई हैं, जो दिन-रात इस महत्वपूर्ण मिशन को कामयाब बनाने में लगे हैं।

वर्तमान में कूनो में कुल 49 चीते हैं, जिनकी व्यक्तिगत स्तर पर प्रतिदिन निगरानी की जा रही है। वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में इसे विश्व का सबसे गहन और अद्वितीय कार्यक्रम माना जा रहा है, जिसमें हर एक चीते की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जाती है।

ये चीते अब केवल कूनो पार्क तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के 12 जिलों में 6000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के विशाल क्षेत्र में फैल चुके हैं। इन 49 चीतों में से 30 को सैटेलाइट कॉलर लगाए गए हैं। फिलहाल, 20 चीते खुले जंगल में विचरण कर रहे हैं, जबकि 10 चीतों को 1000 हेक्टेयर के प्राकृतिक बाड़ों में अर्ध-जंगली वातावरण में रखा गया है।

इतने बड़े भूभाग में खुले घूम रहे इन मांसाहारी जीवों के स्वास्थ्य, गतिविधियों और सुरक्षा पर लगातार नज़र रखना एक बड़ी चुनौती है। फील्ड टीमें दिन-रात रेडियो कॉलर से प्राप्त होने वाले सिग्नलों के आधार पर चीतों का पीछा करती हैं। इस कार्य में फील्ड मैनेजर्स, ट्रैकर्स और फ्रंटलाइन स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर काम करते हैं।

बचाव अभियान: एक बड़ी चुनौती

न्यूजलेटर के अनुसार, चीतों का बचाव (रेस्क्यू) ऑपरेशन टीम की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। कई बार चीते को बचाने के लिए टीम को कूनो से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है। एक मार्मिक घटना का जिक्र करते हुए बताया गया कि तेज बारिश के दौरान जब किसी चीते को बेहोश कर उसका इलाज करना होता है, तब डॉक्टर्स और उनकी टीम खुद पूरी तरह भीग जाती है, लेकिन यह सुनिश्चित करती है कि बेहोश चीते पर पानी की एक बूंद भी न गिरे। इस दौरान टीम के सदस्य ऑक्सीजन सिलेंडर, आईवी ड्रिप और अन्य भारी उपकरण लेकर घंटों तक डटे रहते हैं।

'सुपर टीम' की अनूठी भावना

पिछले चार सालों में, इस टीम ने भारतीय मौसम की चुनौतियों, घने जंगलों, परजीवियों और इंसानी आबादी वाले इलाकों के बीच काम करते हुए प्रबंधन की नई रणनीतियाँ सीखी हैं। इस पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी मजबूत टीम भावना है। फील्ड में कोई अधिकारी छोटा या बड़ा नहीं होता; योजना बनाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर पशु चिकित्सक और ट्रैकर्स तक, सभी एक साथ यात्रा करते हैं, साथ भोजन करते हैं और मिलकर हर चुनौती का सामना करते हैं। इन गुमनाम नायकों के लिए यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि देश के एक ऐतिहासिक मिशन को सफल बनाने का गहरा जज्बा है।