श्योपुर जिले के वीरपुर इलाके में एक महिला लगभग 36 घंटे तक बीएसएनएल टॉवर पर चढ़ी रहने के बाद सोमवार शाम करीब सात बजे सुरक्षित रूप से नीचे उतर आई। यह घटना 782.11 करोड़ रुपये की श्योपुर-चंबल समूह पेयजल परियोजना के भूमि सीमांकन विवाद से जुड़ी हुई थी।

इस लंबे चले घटनाक्रम के बाद, महिला को तत्काल वीरपुर के स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उसका उपचार चल रहा है। उसके भाई ने उसे समझा-बुझाकर टॉवर से नीचे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भूमि विवाद और महिला की मांग

श्यारदा गांव निवासी रामा पत्नी बाबूलाल रविवार सुबह से ही टॉवर पर चढ़ी हुई थी। उसकी मुख्य मांग थी कि जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए निर्धारित भूमि के समीप स्थित पट्टाधारियों की 11 बीघा जमीन का उचित सीमांकन किया जाए।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह विवाद पुराने और कथित तौर पर गलत भूमि रिकॉर्ड के कारण उत्पन्न हुआ है। महिला के परिजन और गांव के लोग पूरी रात टॉवर के नीचे डटे रहे, और उसका 10 वर्षीय बेटा भी लगातार अपनी माँ को नीचे आने के लिए पुकारता रहा।

विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई अन्य घटनाएँ

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान, सड़क जाम करने, आत्महत्या के प्रयास और मारपीट जैसी कई अन्य घटनाएँ भी सामने आईं। सोमवार शाम लगभग 5 बजे, प्रदर्शन में शामिल एक युवक ने भी टॉवर पर चढ़कर फांसी लगाने का प्रयास किया, जिसे मौके पर मौजूद लोगों ने सुरक्षित नीचे उतार लिया।

इसके बाद, कुछ आक्रोशित प्रदर्शनकारी नई बस्ती पहुँचे और राठौर परिवार के घर में घुसकर मारपीट की। इस विवाद में लाठी-डंडे और पथराव भी हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस मारपीट में रघुनंदन (75), अशोक (50), कल्लो (60), दुलारी (50), गुड़िया (27) और अंगूरी (40) सहित राठौर परिवार के छह सदस्य घायल हो गए, जिन्हें वीरपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत पर 10 नामजद व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

परियोजना पर असर और प्रशासनिक रुख

श्योपुर-चंबल समूह पेयजल योजना का उद्देश्य 377 गाँवों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाना है। श्यारदा गांव में 7.5 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण स्थल पर चल रहे इस विवाद के कारण पूरी परियोजना का काम बाधित हो गया है।

निर्माण एजेंसी अब तक लगभग 130 किलोमीटर पाइपलाइन बिछा चुकी है और 18 ओवरहेड टंकियों का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। हालांकि, जल शोधन संयंत्र का निर्माण पूरा न होने के कारण इन गाँवों में पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पा रही है।

महिला के टॉवर से नीचे उतरने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत महसूस की है। हालांकि, भूमि विवाद और सीमांकन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासन ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है।