श्योपुर जिले के कराहल कस्बे में मंगलवार को सवर्ण महासभा के बैनर तले विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए एक रैली निकाली और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

नए प्रावधानों से भेदभाव और भय का माहौल बनने की आशंका

प्रदर्शन के दौरान महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए इन नए नियमों से शैक्षणिक परिसरों में आपसी सद्भाव बिगड़ने और जातिगत दूरियां बढ़ने का अंदेशा है। संगठन ने यह भी आशंका जताई कि इन प्रावधानों का दुरुपयोग हो सकता है, जिससे विद्यार्थियों में अनावश्यक डर पैदा होगा।

संगठन ने मांग उठाई कि किसी भी छात्र अथवा छात्रा के विरुद्ध आने वाली हर शिकायत पर बिना पुख्ता सबूत के त्वरित कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया कि यदि कोई शिकायत दुर्भावनापूर्ण या झूठी पाई जाती है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता के खिलाफ भी दंड का प्रावधान तय किया जाना चाहिए ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

संविधान के समानता के अधिकारों की रक्षा की गुहार

ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि यूजीसी के इस नए रेगुलेशन को पूरी तरह से वापस लिया जाए। महासभा ने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के भीतर समानता का भाव बनाए रखना जरूरी है और इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में प्रदत्त अधिकारों की पूरी सुरक्षा होनी चाहिए।

आर्थिक स्थिति को आरक्षण का आधार बनाने की उठी मांग

इस प्रदर्शन के दौरान आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की सुई भी उठाई गई। महासभा के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरक्षण का पैमाना केवल जातिगत नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और उसकी वास्तविक जरूरत को इसका मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।

संगठन ने आगे मांग की कि जो परिवार पहले ही आरक्षण का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से संपन्न हो चुके हैं, उन्हें इस दायरे से बाहर रखा जाए। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपकर छात्रहित और देश के शिक्षित युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की गई।