श्योपुर जिले में किसानों ने सोमवार को सिंचाई संकट और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं को लेकर मुखर विरोध दर्ज कराया। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला की अगुवाई में बड़ी संख्या में अन्नदाता कलेक्ट्रेट पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया।
चंबल नहर में 3,200 क्यूसेक पानी छोड़ने की उठाई मांग
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मुख्य दाहिनी नहर में 3,200 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की पुरजोर मांग उठाई। किसानों का कहना था कि नहर का पानी अंतिम छोर यानी टेल क्षेत्र तक पहुंचना चाहिए, ताकि वहां के किसानों को भी पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिल सके।
किसानों ने श्योपुर जिले के हिस्से के पानी का पूरा लाभ स्थानीय स्तर पर देने और जल वितरण की व्यवस्था की प्रभावी निगरानी कराने पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि टेल क्षेत्र तक पानी पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
167 करोड़ की सूक्ष्म सिंचाई परियोजना में लीकेज और जांच की मांग
ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने करीब 167 करोड़ रुपए की लागत से 35 गांवों के लिए तैयार की गई चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि टेस्टिंग के दौरान ही मुख्य लाइन समेत कई स्थानों पर लीकेज सामने आ चुके हैं।
किसानों ने इस पूरी परियोजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जांच में भ्रष्टाचार या तकनीकी अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, कंपनी और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
मूझरी बांध और ओपन नहर प्रणाली को लेकर भी रखा पक्ष
किसानों ने लगभग 415 करोड़ रुपए की लागत वाली मूझरी बांध परियोजना का काम भी शीघ्र आरंभ कराने की मांग की। उनका तर्क है कि इस बांध के बन जाने से क्षेत्र में सिंचाई का दायरा काफी बढ़ जाएगा और भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
इसके अलावा, मूझरी बांध परियोजना के तहत ओपन नहर प्रणाली का निर्माण कराने की भी मांग उठी, ताकि पानी का फैलाव अधिक क्षेत्र में हो सके। प्रदर्शन के अंत में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!