चंबल नदी के घाटों पर रात के वक्त सक्रिय रहने वाले अवैध रेत माफियाओं पर नकेल कसने के लिए वन विभाग ने कमर कस ली है। अब पारंपरिक गश्त के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित कैमरों की मदद ली जाएगी, जिससे रात के अंधेरे में भी वाहनों और मशीनों की आवाजाही छुप नहीं सकेगी।
टिकरी-रिठौरा में 45 मीटर ऊंचा टॉवर तैयार
मप्र वन विभाग की ओर से टिकरी-रिठौरा इलाके में करीब 45 से 50 मीटर ऊंचा टॉवर खड़ा किया गया है। इस टॉवर पर हाई-रेंज कैमरे लगाए गए हैं जो लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में होने वाली हलचल को स्वतः भांप लेंगे। जैसे ही कोई वाहन या मशीन नदी के पास पहुंचेगी, सिस्टम तुरंत उसकी तस्वीरें और जीपीएस लोकेशन कैप्चर कर लेगा।
सीधे अफसरों के पास पहुंचेगा अलर्ट
इस अत्याधुनिक व्यवस्था के तहत कैमरे द्वारा ली गई तस्वीरें और लोकेशन सीधे तौर पर डीएफओ और अभयारण्य अधीक्षक के मोबाइल या कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। इस तकनीक के शुरू होने से उन मामलों में भी प्रभावी कार्रवाई हो सकेगी जो रात के समय अंधेरे का लाभ उठाकर अंजाम दिए जाते हैं।
राजस्थान सीमा से भी होगी निगरानी
चंबल के राजघाट पर नदी का भौगोलिक मोड़ ऐसा है कि वहां मप्र की तरफ से स्थापित टॉवर से पूरी मुस्तैदी के साथ निगरानी रखना संभव नहीं था। इसे देखते हुए मप्र ने राजस्थान सीमा में टॉवर लगाने की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद राजस्थान वन विभाग ने खुद अपने छोर पर टॉवर लगाकर इस संवेदनशील क्षेत्र पर नजर रखने और मप्र के अधिकारियों को सूचना देने का निर्णय लिया है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के पालन में तीनों राज्यों—मप्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—द्वारा यह निगरानी तंत्र विकसित किया जा रहा है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान के अनुसार टिकरी-रिठौरा में उनका टॉवर पूरी तरह बनकर तैयार है और सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन तथा ट्रायल पूरा होने के बाद इसे आगामी एक-दो दिन में पूरी तरह से सक्रिय कर दिया जाएगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!