मुरैना जिले में माता की प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर शुरू हो गया है, जिसके लिए प्रशासन और पुलिस द्वारा तमाम तैयारियां किए जाने के दावे किए गए थे। हालांकि, जिले के सबसे बड़े विसर्जन स्थल आसान नदी के छौंदा पुल पर प्रशासनिक दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
रोशनी के इंतजाम नाकाफी, बिजली सप्लाई गायब
छौंदा पुल पर प्रशासन की ओर से लाइटिंग तो जरूर लगवाई गई है, लेकिन समय पर बिजली की मुमुक्ति या व्यवस्था न होने के कारण पूरा विसर्जन स्थल अंधेरे में डूबा हुआ है। हालात यह हैं कि बड़ी संख्या में विसर्जन के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं को अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों की हेडलाइट्स चालू कर उजाला करना पड़ रहा है।
इस गंभीर अव्यवस्था का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस प्रकार लोग अंधेरे के बीच जोखिम उठाकर विसर्जन करने को मजबूर हैं। इस लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
बढ़ सकता है हादसे का खतरा
विसर्जन के दौरान घाट पर भारी भीड़ और गहमागहमी रहती है। ऐसे में पर्याप्त रोशनी का अभाव किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। नदी के किनारे अंधेरा होने के कारण ट्रैक्टर बैक करने या प्रतिमा को पानी में ले जाते समय दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।
अधिकारियों ने जल्द व्यवस्था सुधारने का दिया आश्वासन
विसर्जन स्थल पर लाइटिंग के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए गए थे और यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि कार्य पूरा होने तक बिजली गुल न हो। यदि वहां अब भी अंधेरा है और लाइटें नहीं जल रही हैं, तो इस मामले की जानकारी लेकर तुरंत व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी।
यह बयान मुरैना के एडीएम अश्वनी कुमार रावत द्वारा दिया गया है। स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने मांग की है कि विसर्जन के बचे हुए दिनों को देखते हुए प्रशासन तुरंत मौके पर बिजली और रोशनी की मु मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!