ग्वालियर-चंबल आंचल के मुरैना जिले के अंतर्गत आने वाले रामपुर कलां क्षेत्र में पेयजल की किल्लत स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। यहां सरकारी स्तर पर स्थायी जल आपूर्ति की व्यवस्था न होने के कारण करीब 17 हजार की आबादी पूरी तरह एक निजी बोरवेल पर निर्भर है। स्थिति यह है कि पिछले 12 वर्षों से लोग अपने घरों की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए इसी निजी स्रोत से पानी खरीद रहे हैं।

खंभों और दीवारों से गुजरता पानी का नेटवर्क

गांव की गलियों में प्रवेश करते ही इस अनोखी निजी व्यवस्था का जाल साफ नजर आता है। घरों तक पानी पहुंचाने के लिए बिजली के खंभों, मकानों की दीवारों और बालकनियों के सहारे काली पाइपलाइनें बिछाई गई हैं। हालांकि कई जगहों पर पाइपों में लीकेज भी देखा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद यही नेटवर्क ग्रामीणों के लिए पानी का एकमात्र सहारा बना हुआ है। गांव में लगे कुछ हैंडपंप या तो खराब हैं या उनसे पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है।

समय के हिसाब से तय है पानी का मासिक शुल्क

इस निजी बोरवेल के संचालक मोनू धाकड़ के अनुसार, उनके पिता ने यह बोर कृषि कार्य के लिए कराया था जिसमें प्रचुर मात्रा में पानी निकला। बाद में खेती बंद हो जाने पर आसपास के घरों की जल आवश्यकता को देखते हुए पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई। वर्तमान में इस व्यवस्था के तहत आधे घंटे की दैनिक जल आपूर्ति के लिए 200 रुपए और एक घंटे की सप्लाई के लिए 400 रुपए प्रतिमाह वसूले जाते हैं।

प्रशासन ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन

लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान नेता पेयजल का मुद्दा जोर-शोर से उठाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। वहीं, इस मामले पर जिला पंचायत सीईओ कमलेश भार्गव का कहना है कि रामपुर क्षेत्र में पानी की समस्या संज्ञान में है। प्रशासन की एक टीम भेजकर वस्तुस्थिति का जायजा लिया जाएगा और आवश्यकतानुसार नए बोर कराने के साथ ही बंद पड़े स्रोतों की जांच कराकर समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।