अंचल के बड़े स्वास्थ्य केंद्रों में शुमार सबलगढ़ सिविल अस्पताल इन दिनों गंभीर डॉक्टर कमी के दौर से गुजर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के नए आदेशों के बाद अस्पताल में सेवाएं दे रहे कुछ चिकित्सकों को उनके मूल पदस्थापना स्थलों पर वापस भेज दिया गया है, जिससे व्यवस्थाएं और अधिक चरमरा गई हैं।

मेडिकल ऑफिसर के सभी सातों पद रिक्त

विभाग की ओर से पूर्व में कुछ बॉन्ड वाले डॉक्टरों को यहां तैनात किया गया था, लेकिन उनमें से आधे यानी तीन डॉक्टरों ने अपनी जॉइनिंग ही नहीं दी। वर्तमान स्थिति यह है कि अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के सभी सातों पद पूरी तरह से खाली पड़े हुए हैं। ओपीडी कक्ष खाली रहने के कारण कई बार मरीजों को बिना इलाज के ही मायूस होकर वापस लौटना पड़ रहा है।

छह साल से खाली हैं विशेषज्ञ पद

अस्पताल की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां पिछले छह वर्षों से विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त चल रहे हैं। श्वास एवं छाती रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन और फिजिशियन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को मजबूरन महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है या फिर उन्हें जिला मुख्यालय व अन्य बड़े शहरों के लिए रेफर किया जा रहा है।

सीएचओ के भरोसे चल रही ओपीडी व्यवस्था

इस चिकित्सा केंद्र में रोजाना लगभग 600 से 800 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर खाली पदों को भरने के लिए फिलहाल ओपीडी चैंबरों में स्वास्थ्य केंद्रों के सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) को बैठाकर काम चलाया जा रहा है, जिससे मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सीय परामर्श मिलने में बाधा आ रही है।

चिकित्सक डॉ. आर.एन. शर्मा ने स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि हाल ही में मूल स्थानों पर लौटे डॉक्टरों के अटैचमेंट से अस्पताल का संचालन सुचारू था, लेकिन उनके जाने से मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने शासन से मांग की है कि जल्द से जल्द सबलगढ़ अस्पताल में स्थाई डॉक्टरों की पदस्थापना की जाए ताकि आमजन को राहत मिल सके।