मुरैना जिले के सबलगढ़ स्थित सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी चल रही है, जिसके चलते सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर हालात में आने वाले मरीजों तक को अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

इन विभागों में नहीं हैं चिकित्सक

अस्पताल के भीतर विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। मिली जानकारी के अनुसार, संस्थान में मेडिसिन, हृदय रोग, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग, नाक-कान-गला (ईएनटी), नेत्र रोग और दंत रोग से जुड़े एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर की नियमित तैनाती नहीं है।

चिकित्सकों की इस भीषण कमी से निपटने के लिए अब वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। हालात यह हैं कि आपातकालीन सेवाओं को सुचारू रखने के वास्ते झुंडपुरा, रामपुर, टैंटरा और मांगरौल जैसे ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से डॉक्टरों को बुलाकर इमरजेंसी ड्यूटी कराई जा रही है।

100 बेड की घोषणा अब तक अधूरी

क्षेत्र के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के दावे कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं। आज से चौदह साल पहले यानी वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस चिकित्सालय को 100 बिस्तरों की क्षमता वाला बनाने की बड़ी घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर यह अस्पताल आज भी केवल 50 बिस्तरों के साथ ही संचालित हो रहा है।

प्रशासन स्तर पर प्रस्ताव भेजने की तैयारी

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सुधरो के प्रयास जारी हैं। सीबीएमओ आरएन शर्मा के अनुसार, सबलगढ़ सिविल अस्पताल की बिस्तर क्षमता बढ़ाकर 100 करने के संबंध में अब जिला चिकित्सालय के जरिए प्रदेश शासन को नया प्रस्ताव भेजने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया है कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सख्त जरूरत है। इस बाबत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से दोबारा चर्चा कर जल्द ही डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आमजन को राहत मिल सके।