मुरैना में शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यावहारिक बनाने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर नए सुझाव सामने आए हैं। वर्तमान समय में तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए शिक्षा के ढांचे में बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
हर स्तर पर तय होनी चाहिए कार्य की जिम्मेदारी
अमर शहीद पं. रामप्रसाद बिस्मिल शिक्षा एवं जनकल्याण सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. नरेश सिंह सिकरवार ने इस संबंध में अपने विचार रखे हैं। उनका कहना है कि शिक्षण कार्य में सुधार लाने के लिए केवल शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि संकुल, ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक हर एक घटक की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
संगठन द्वारा शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों से भी संवाद किया गया है। इसके आधार पर तैयार किए गए सुधार संबंधी प्रस्ताव केंद्रीय शिक्षा मंत्री और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद को प्रेषित किए गए हैं।
मूल्यांकन का तरीका बदलने की मांग
सुझावों में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों के कार्य निष्पादन और व्यावसायिक आचार संहिता के लिए स्पष्ट मानक बनाए जाएं। इसके अलावा शिक्षकों का मूल्यांकन केवल परीक्षा के परिणामों के आधार पर न किया जाए, बल्कि यह प्रक्रिया सुधारात्मक होनी चाहिए।
मूल्यांकन के दौरान विद्यालय के संसाधन, स्थानीय चुनौतियां और विद्यार्थियों की सामाजिक पृष्ठभूमि जैसी वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रशिक्षण और डिजिटल तकनीक पर जोर
फाउंडेशन ने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विषय ज्ञान के साथ-साथ बाल मनोविज्ञान, नैतिकता, संवाद कौशल, मानसिक स्वास्थ्य और नेतृत्व क्षमता को शामिल करने पर बल दिया है।
इसके अतिरिक्त, शिक्षा प्रणाली में ब्लेंडेड लर्निंग, कौशल आधारित शिक्षा और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने की बात कही गई है। शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैकिंग सिस्टम, एआई का उपयोग और साइबर सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण के सुझाव भी दिए गए हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!