मुरैना जिले के सबलगढ़ क्षेत्र में आवारा पशुओं की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। शहर के पेट्रोल पंप से लेकर सिविल हॉस्पिटल तिराहे तक शाम ढलते ही छुट्टा सांडों का डेरा जम जाता है। स्थिति यह है कि मुख्य मार्ग किसी अघोषित गौशाला की तरह नजर आते हैं, जिससे आम नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राहगीरों पर हमला कर रहे हैं आक्रामक सांड
स्थानीय निवासी दौजी राम जाटव का कहना है कि जब इन सांडों को रास्ते से हटाने का प्रयास किया जाता है, तो वे उल्टे हमलावर हो जाते हैं। रहवासी प्रमोद शर्मा ने बताया कि अचानक सड़क पर आ धमकने वाले ये पशु बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर निशाना बनाते हैं, जिससे पूरे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है।
लगता है जाम और हादसों का अंदेशा
सड़कों के बीचों-बीच डेरा जमाने के कारण मुख्य मार्गों और चौराहों पर यातायात भी बाधित होता है। रात के अंधेरे में बैठे हुए सांड वाहन चालकों को नजर नहीं आते, जिससे गंभीर सड़क हादसों की आशंका बनी रहती है। नागरिकों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन नतीजा सिफर है।
सोमनाथ उर्फ राजू बाबा, रामकेश, महेश और कैरी सिंह सहित तमाम स्थानीय लोगों ने इन आवारा पशुओं को सुरक्षित गौशालाओं या कांजी हाउस में शिफ्ट किए जाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि रामपुर रोड पर जनसहयोग से नंदीशाला का निर्माण कराया गया था, फिर भी नगर पालिका द्वारा इन सांडों को वहां नहीं पहुंचाया गया है।
अस्पताल में रोज पहुंच रहे घायल मरीज
अस्पताल के डॉक्टर बृजेश गोयल के मुताबिक, रविवार को भी सांड के हमले में कन्हैया और धीरज घायल हो गए, जिनमें कन्हैया की हालत गंभीर है। उन्होंने बताया कि सांडों के हमले से चोटिल होने के ऐसे मामले रोजाना अस्पताल में दर्ज किए जा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएमओ अतर सिंह रावत ने स्वीकार किया कि शहर में आवारा पशुओं की तादाद बढ़ चुकी है और इनमें कुछ आक्रामक जानवर भी शामिल हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि इन मवेशियों को पकड़ने के लिए जल्द ही बड़े वाहन की व्यवस्था की जा रही है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!