बरसात के बाद बढ़ी अवैध उत्खनन की आशंका
मुरैना में बरसात का सीजन खत्म होते ही चंबल नदी के इलाके में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खतरा एक बार फिर गहराने लगा है। इस गतिविधि पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा-निर्देशों के बाद जिला टास्क फोर्स पूरी तरह सक्रिय हो गई है।
इसी सिलसिले में पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना और डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल रविवार की देर शाम पुलिस एवं वन विभाग के अमले के साथ चंबल के कई संवेदनशील घाटों का निरीक्षण करने पहुंचे। अधिकारियों की इस टीम ने देर रात तक घाटों पर डेरा डालकर स्थिति का जायजा लिया।
संवेदनशील घाटों और नेशनल हाईवे का निरीक्षण
दौरे के दौरान अधिकारियों ने राजघाट, रहू घाट, गडौरा घाट, रिठौरा घाट, कुठियाना और चिन्नानी समेत चंबल नदी से जुड़े तमाम संवेदनशील घाटों का प्रत्यक्ष मुआयना किया। इसमें विशेष तौर पर नेशनल हाईवे-44 से जुड़े राजघाट वाले हिस्से पर सुरक्षा और निगरानी का विशेष फोकस रखा गया है।
हालांकि, अधिकारियों के घाटों पर मौजूद रहने के दौरान रेत से भरी कोई भी ट्रैक्टर-ट्रॉली वहां नहीं पहुंची और न ही मौके पर अवैध उत्खनन के कोई ताजा निशान पाए गए। बावजूद इसके, शहर के भीतर लगातार पहुंच रही रेत के कारण स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि यह सामग्री आखिर किन डंपिंग क्षेत्रों से आ रही है।
16 नई चौकियों से होगी चौबीस घंटे निगरानी
डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल ने जानकारी दी कि चंबल के संवेदनशील इलाकों में अवैध रेत के कारोबार पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए 16 नई वन चौकियों का निर्माण किया जा रहा है। इन स्थानों पर वन कर्मियों के साथ-साथ एसएएफ का सशस्त्र बल भी तैनात किया जाएगा।
इन सभी चौकियों के जरिए 24 घंटे लगातार निगरानी रखी जाएगी तथा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों और जीपीएस तकनीक का भी सहयोग लिया जाएगा।
रात्रि गश्त और सख्त कार्रवाई के निर्देश
पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने स्पष्ट किया है कि चंबल नदी क्षेत्र में किसी भी कीमत पर अवैध रेत उत्खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए जिले के सभी संबंधित थाना प्रभारियों और चेकपोस्ट प्रभारियों को सख्त हिदायत दी गई है।
एसपी और डीएफओ पिछले दो दिनों से लगातार रात के वक्त विभिन्न घाटों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं, जिससे अवैध रेत के कारोबारियों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!