मुरैना जिले की दिमनी विधानसभा क्षेत्र के जोन्हा गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब एक नए मोड़ पर आ गया है। पिछले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे नवनीत सिंह तोमर और उनके कुछ साथियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई करते हुए अंबाह जेल भेज दिया है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और पुलिस कार्रवाई

नवनीत सिंह तोमर जोन्हा गांव में सड़क बनाने की मांग को लेकर पिछले तीन दिनों से अनशन पर थे। उनके इस आंदोलन को स्थानीय ग्रामीणों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा था। हालांकि, शुक्रवार शाम को हुई बारिश के कारण धरना स्थल पर लोगों की संख्या में कमी आ गई थी, लेकिन नवनीत अपने कुछ सहयोगियों के साथ वहीं डटे हुए थे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शुक्रवार शाम को एसडीओपी रवि प्रताप भदौरिया के नेतृत्व में पुलिस और प्रशासनिक दल धरना स्थल पर पहुंचा। पुलिस ने नवनीत सिंह तोमर और उनके साथियों को स्वास्थ्य जांच और उपचार का हवाला देते हुए एंबुलेंस में बैठा लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें अंबाह अस्पताल ले जाने की बात कही गई थी।

आरोप है कि एंबुलेंस को अंबाह की बजाय मुरैना की दिशा में मोड़ दिया गया। इसे देख नवनीत सिंह तोमर और उनके साथी चलती एंबुलेंस से कूद गए। इसके बाद बरेह तिराहे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर सभी आंदोलनकारियों को अपने वाहनों में बैठाया और पहले अंबाह थाने ले गई।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

इस घटना पर एसडीओपी रवि प्रताप भदौरिया ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि नवनीत सिंह तोमर और उनके साथियों को केवल मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया जा रहा था। उन्होंने वाहन से कूदने का प्रयास किया, जिसके बाद बरेह गांव के पास हाईवे पर एंबुलेंस रोकनी पड़ी। एसडीओपी ने यह भी बताया कि वहां भी आंदोलनकारियों ने हंगामा शुरू कर दिया था और हाईवे जाम करने की आशंका बन गई थी।

एसडीओपी भदौरिया के अनुसार, सभी का पहले मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए धारा 151 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया। कार्रवाई पूरी होने के बाद नवनीत सिंह तोमर और उनके साथियों को अंबाह जेल भेज दिया गया।

अंबाह तहसीलदार नरेश शर्मा ने भी इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस नवनीत तोमर को धारा 151 के तहत कार्रवाई के लिए लेकर आई थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया। उन्होंने पुष्टि की कि मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पताल ले जाते समय नवनीत और उनके साथियों ने एंबुलेंस से कूदने की कोशिश की थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।